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दिल्ली हिंसा की आग दोबारा भड़काने की साजिश तो नहीं! पता लगाने में जुटी स्पेशल ब्रांच

Tue, 17 Mar 2020 02:43 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

स्पेशल ब्रांच के पुलिसकर्मियों की कई टीमें उत्तर-पूर्वी दिल्ली में तैनात की गई हैं। ये टीमें हिंसा वाले क्षेत्रों के अलावा निकटवर्ती इलाकों में भी जा रही हैं।
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दिल्ली हिंसा - फोटो : अमर उजाला (फाइल)
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विस्तार
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देश में भले ही चारों ओर कोरोना वायरस की बात हो रही है, मगर दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच का ध्यान बीते दिनों हुई हिंसा पर लगा है। यह ब्रांच उत्तर-पूर्वी दिल्ली में लोगों के बीच में जाकर पता लगा रही है कि क्या दिल्ली हिंसा की आग अभी सुलग रही है या पूरी तरह बुझ चुकी है। कहीं किसी जगह पर दोबारा से हिंसा भड़काने की साजिश तो नहीं रची जा रही है।

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खासतौर पर जाफराबाद, मौजपुर, गोकुलपुरी, बाबरपुर, चांदबाग और बृजपुरी आदि इलाकों में स्पेशल ब्रांच की कई टीमें स्थानीय लोगों में घुल मिलकर उनसे अंदर की बात निकलवाने का प्रयास कर रही हैं। हिंदू मुस्लिम, इन दोनों समुदायों के लोग हिंसा को कितना भूले हैं, इस बाबत भी खास रिपोर्ट तैयार हो रही है।
 

दिल्ली हिंसा से पहले और उसके बाद जिस तरह से राजनीतिक बयानबाजी का दौर चला, उससे इंटेलिजेंस एजेंसियों की नींद उड़ गई थी। राजनेताओं की बयानबाजी को आधार बना कर सोशल मीडिया पर दिल्ली हिंसा से जुड़ी अनेक भ्रामक खबरें वायरल की गईं। स्पेशल सेल अभी ऐसी खबरें फैलाने वालों की जांच कर रही है।

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पहले यह माना जा रहा था कि दिल्ली हिंसा के बाद शाहीन बाग का प्रदर्शन खत्म हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी वजह से इंटेलिजेंस एजेंसियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच को भी कुछ ऐसी ही अपुष्ट सूचनाएं मिलीं कि हिंसा की आग दोबारा सुलग सकती है।

दोनों ही समुदायों के कुछ हिस्से में उग्रता देखी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इसके चलते स्पेशल ब्रांच के पुलिसकर्मियों की कई टीमें उत्तर-पूर्वी दिल्ली में तैनात की गई हैं। ये टीमें हिंसा वाले क्षेत्रों के अलावा निकटवर्ती इलाकों में भी जा रही हैं।

चूंकि स्पेशल ब्रांच के पुलिसकर्मी सिविल कपड़ों में होते हैं, इसलिए वे आसानी से हर तबके के लोगों के साथ घुल मिल लेते हैं।

स्पेशल ब्रांच को मिला है ये टॉस्क... 

  • हिंसा वाले इलाकों में जो लोग वापस गए थे, वे लौटे हैं या नहीं 
  • कितने नए लोग और कहां से आए हैं, उनमें युवाओं की संख्या क्या है 
  • हिंसा के बाद वहां के लोगों की सोच किस तरफ जा रही है 
  • हिंदू-मुस्लिम समुदाय, एक दूसरे को लेकर कितने संजीदा हैं 
  • क्या कहीं अशांति या दंगा कराने जैसी साजिश तो नहीं रची जा रही है 
  • मदद के बहाने लोगों के बीच आने वाले राजनेता उनसे क्या कह रहे हैं 
  • कितनी कालोनी या मुहल्ले ऐसे हैं जो हिंसा को भुलाने में लगे हैं 
  • हिंसा में शामिल बाहरी लोगों का आवागमन जारी है या बंद हो गया 
  • ऐसे लोग, जिन्होंने दंगों के बाद पहले वाला काम छोड़ दिया हो 
  • संबंधित इलाके में सोशल मीडिया पर कैसी प्रतिक्रियाएं चल रही हैं 
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