दिल्ली उच्च न्यायालय ने आधी रात को सुनवाई कर पुलिस को, संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को लेकर पूर्वोत्तर दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा में घायल हुए लोगों को सुरक्षित निकाल कर सरकारी अस्पतालों में ले जाने और उनका तत्काल उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। इसी मामले पर आगे सुनवाई करते हुए अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि वह शहर को दूसरी बार 1984 नहीं बनने देंगे। अदालत में मामले की अगली सुनवाई 28 फरवरी को होगी जानिए कोर्ट में क्या-क्या हुआ...
आखिरी सुनवाई में अदालत में क्या-क्या हुआ
- अदालत की सुनवाई शुरू हुई तो अदालत ने केंद्र और राज्य दोनों की इकाईयों को पीड़ितों और उनके परिवार से निजी रूप से मिलने के लिए कहा। अदालत ने कहा कि समय आ गया है कि लोगों में विश्वास पैदा किया जाए।
- जस्टिस मुरलीधर ने आगे कहा कि समय आ गया है कि हम लोगों को बताएं कि जेड सिक्योरिटी सबके लिए है।
- जस्टिस मुरलीधर ने आगे कहा कि हम अपनी आंख के सामने शहर में दूसरा 1984 नहीं होने दे सकते।
- अदालत ने कहा कि वह चाहती है कि वकील जुबैदा बेगम इस मामले में एमिकस बनें।
- अदालत ने आगे कहा कि हमने सुना है कि एक आईबी अफसर पर भी हमला किया गया था जिसमें उसकी जान चली गई। इन सभी बातों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।
- अदालत ने लोगों के अंतिम संस्कार के समय भी उन्हें सुरक्षा मुहैया कराने को कहा है।
- अदालत इस मामले पर एक रात्रि मजिस्ट्रेट नियुक्त करने का सोच रही है ताकि त्वरित कार्रवाई की जा सके।
- जस्टिस मुरलीधर ने आगे कहा कि यह दिखाता है कि अगर प्रशासन कार्रवाई करना चाहे तो बहुत कुछ हो सकता है। यह वास्तविक प्रदर्शन है कि कैसे पुलिस अधिकारी एक्शन लेने के लिए ऑर्डर आने का इंतजार करते हैं।
- अदालत ने आगे कहा कि वो विचार कर रही है कि कैसे जब शख्स जो परेशानी में है पुलिस को कॉल करता है तो उसे तुरंत रिस्पॉन्स मिले और मदद उस तक पहुंचे। इस पर राहुल मेहरा ने सरकारी अस्पतालों में हेल्प डेस्क बनाने के लिए कहा।
- अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि उन्हें लगातार लोगों को उसी तरह जवाब देना होगा जैसा उन्होंने इस अदालत के आधी रात के आदेश के बाद किया। इसके साथ ही पुलिस को लोगों को हर सुविधा मुहैया कराने को कहा जिससे उन्हें परिजनों के शव मिलने में आसानी हो और अंतिम संस्कार के वक्त सुरक्षा भी दी जाए।
- अदालत ने सभी जिलों के कानूनी सेवा केंद्रों पर 24*7 की हेल्प डेस्क बनाने के भी निर्देश दिए। अदालत ने जुबेदा बेगम को एमिकस नियुक्त किया है। उन्हें दिल्ली सरकार एक नंबर मुहैया कराएगी जिससे लोगों को मदद मिल सके।
- जुबेदा बेगम अदालत की नोडल अफसर होंगी। वो पीड़ितों के साथ समन्वय करेंगी और सुनिश्चित करेंगी कि अदालत के आदेशों का पालन हो। उन्हें गृहमंत्रालय से भी जरूरी सहायता मिलेगी।
- बेघर लोगों को उचित शेल्टर मिले इसे भी दिल्ली सरकार ही सुनिश्चित करेगी। उन्हें जरूरी चीजें, कंबल, साफ पानी और शौचालय की सुविधा भी उपलब्ध करानी होगी।
- वक्त की मांग है कि लोगों का भरोसा जीता जाए। हेल्पलाइन नंबरों का भी अच्छे से प्रचार करने को कहा गया है। अदालत इस मामले की अगली सुनवाई 28 फरवरी को करेगा।