अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ न तो कोई पब्लिक का गवाह है न ही कोई पुलिसकर्मी। अदालत ने माना कि खालिद के खिलाफ ऐसा कोई साक्ष्य नहीं कि उसने दंगों के लिए षड्यंत्र रचा। इस मामले में जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र दाखिल हो चुका है। आरोपी से किसी भी प्रकार की बरामदगी नहीं हुई है। अदालत ने कहा याची एक अक्तूबर 2020 से जेल में है और ट्रायल में काफी देरी होगी।
इसी प्रकार इस मामले में कई आरोपियों को इस अदालत ने तो कई अन्य को हाईकोर्ट ने जमानत प्रदान कर दी है। ऐसे में उनका मानना है कि वह जमानत पाने का हकदार है। अदालत ने आरोपी को 20 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके व एक अन्य जमानत राशि पर जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने खालिद को साक्ष्यों व गवाहों को प्रभावित न करने व इलाके में शांति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
पुलिस ने आरोप लगाया था कि दंगों के गहरे षड्यंत्र के तहत करावल नगर में दंगे हुए थे और भींड ने पत्थरबाजी के अलावा आगजनी की थी। मुख्य आरोपी ताहिर के घर की छत से भी दंगोइयों ने हंगामा किया था। आरोपी पर गंभीर आरोप है। वहीं बचाव पक्ष ने अन्य तर्को के अलावा उसे राजनीतिक कारणों से फर्जी मामले में फंसाने का भी तर्क रखा था।