राजधानी के ग्रामीणों को कोरोना से बचाव वाली वैक्सीन लगवाने में डर लग रहा है। उत्तर पश्चिम दिल्ली के करीब एक दर्जन गांवों के अनेक ग्रामीण प्रशासन की पहल के बावजूद वैक्सीन लगवाने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। प्रशासन ने इन गांवों में ग्रामीणों को वैक्सीन लगवाने के मामले में जागरूक करने के लिए अभियान चलाया है।
राजधानी के गांवों में बहुत कम लोगों को वैक्सीन लगी है। एक ओर बड़ी संख्या में ग्रामीण वैक्सीन लगवाने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। दरअसल उनको वैक्सीन लगवाने में डर लग रहा है, वहीं दूसरी ओर समस्त गांवों में वैक्सीन लगाने की व्यवस्था नहीं है। उन्हीं गांवों में वैक्सीन लगाई जा रही है, जिनमें डिस्पेंसरी एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। इस कारण उत्तर पश्चिम जिला प्रशासन ने कंझावला सब डिवर्जन के गांवों में वैक्सीन लगाने के लिए अभियान आरंभ किया है। प्रशासन ने 31 जुलाई तक समस्त गांवों के निवासियों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा है।
कंझावला सब डिवर जन ने पंजाब खोड़ गांव से अपने अभियान की शुरूआत की। इस दौरान गांव के अनेक बुजुर्गों ने वैक्सीन लगवाने से मना कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि वैक्सीन लगवाने पर लोगों को दिक्कत होती है। इस कारण वे वैक्सीन नहीं लगवाएंगे। हालांकि प्रशासन ग्रामीणों के इन तर्कों के बारे में मालूम होने के मद्देनजर अपने अभियान को कामयाब करने के लिए पूरे तामझाम के साथ गांव में पहुंचा है।
प्रशासन समस्त ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक की टीम की मदद ले रहा है। इस दौरान कलाकार ग्रामीणों को समझाते हुए वैक्सीन नहीं लगवाने वालों और वैक्सीन लगी होने वालों के बारे में उदाहरण प्रस्तुत कर रहे है। दूसरी ओर प्रशासन गांवों के प्रमुख व्यक्तियों के साथ-साथ उन लोगों की ग्रामीणों को जागरूक करने में मदद ले रहा है, जिन्होंने वैक्सीन लगवा रखी है। ये ग्रामीण अपने गांव के लोगों को बताते है कि वैक्सीन लगवाने पर उन्हें कोई समस्या नहीं हुई है। इस कारण वह भी वैक्सीन लगवा ले। इसके बाद गांव के कुछ लोग वैक्सीन लगवाने के लिए आगे आने शुरू हो गए है।
कंझावला सब डिविजन के 14 गांवों में 31 जुलाई तक वैक्सीन लगाने का अभियान चलेगा। इस दौरान सबसे अधिक वैक्सीन लगवाने वाले ग्रामीणों के गांव को सम्मानित किया जाएगा। इस संबंध में गांव के बाहर बोर्ड भी लगवाया जाएगा।