प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वच्छ भारत मिशन रंग लाता दिख रहा है। पीएम मोदी के मिशन से पूरा देश प्रेरणा ले रहा है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी में शिक्षक और छात्र अगले पांच साल तक गांधीगीरी करते नजर आएंगे। डीयू कुलपति प्रो. दिनेश सिंह की ओर से गठित स्वच्छता अभियान समिति प्रत्येक माह की दो तारीख को इसकी मॉनिटरिंग करेगी।
दरअसल डीयू में बृहस्पतिवार को गांधी भवन से स्वच्छता अभियान की मुहिम शुरू होगी।
दिल्ली विवि में स्वच्छ अभियान समिति के सह अध्यक्ष प्रो चंद्रशेखर ने बताया कि अभियान के लिए कॉलेजों और विभागों को भी निर्देशित किया गया है कि वह भी अपने यहां कमेटी बनाएं जिसमें शिक्षक, छात्रों व कर्मचारियों को स्वच्छता के प्रति प्रोत्साहन करें कि कैसे इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
ये है डीयू का पूरा प्लान
डीयू की स्वच्छ अभियान समिति के कोआर्डिनेटर डॉ विपिन तिवारी ने बताया कि स्वच्छता अभियान निरंतर चलने वाली प्रक्रिया रहेगी इसके लिए हर माह की दो तारीख से तीन दिन पहले अभियान शुरू होगा और उसको कमेटी मॉनिटर करेगी।
कमेटी के सदस्य कॉलेज व विभागों में जाएंगे और वहां शिक्षकों छात्रों को स्वच्छता के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उसमें भागीदारी करेंगे। इस अभियान के तहत छात्रों व शिक्षकों, नॉन टीचिंग स्टॉफ में यह जागरूकता उत्पन्न करने की कोशिश की जाएगी कि कैंपस को साफ करना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है।
कचड़े व कबाड़ के निस्तारण पर विशेषज्ञों की नजर
डीयू की स्वच्छता अभियान समिति की नजर कैंपस की सुरक्षा पर भी रहेगी। इसके लिए समिति में निस्तारण विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा जो यह बताऐंगे कि विभिन्न प्रकार के कबाड़ व कचड़े का निस्तारण कहां और कैसे करना है। इस तरह से कोबाल्ट-60 जैसे प्रकरण जैसी घटनाओं को भी रोका जा सकेगा।
मालूम हो कि वर्ष 2010 में कोबाल्ट-60 प्रकरण के कारण मायापुरी इलाके में रेडिएशन फैल गया था। दरअसल, डीयू ने कोबाल्ट-60 से लैस गामा मशीनें कबाड़ में बेच दी थी।
चरखा सीखने वालों के लिए शर्त
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र चरखे से गांधीगीरी सीख रहे हैं। दरअसल, युवाओं में गांधीवादी विचारों को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय ने फरवरी में चरखा चलाने का प्रशिक्षण देने का कोर्स शुरू किया गया है। इस कोर्स के लिए छात्रों से कोई फीस भी नहीं ली जा रही है। तीन माह के कोर्स के बाद ही सर्टिफिकेट मिलता है।
गांधी भवन में डिप्टी डीन एकेडमिक्स निशा बाला त्यागी ने बताया कि फरवरी माह से चरखा चलाने की ट्रेनिंग के लिए एक कोर्स शुरु किया गया है। इस कोर्स के लिए हर बुधवार को दोपहर तीन से शाम पांच बजे तक विवि के गांधी भवन में क्लास लगती है। चरखा सीखने वालों के लिए शर्त यह है कि वह खादी के कपड़े पहन कर आएं।
कोर्स शुरू होने के बाद यह केवल डीयू के स्टूडेंट के लिए ही था लेकिन अब इसे छात्र, शिक्षक व अन्य लोग भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं में इस कोर्स को लेकर रुझान बढ़ रहा है। फरवरी में केवल 13 छात्र थे। अब छात्रों की संख्या सौ हो चुकी है। इसमें लड़कियों से ज्यादा लड़के पंजीकरण करा रहे हैं।