सिंह ने वर्ष 2021 में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति का पद संभाला था। अपने पहले कार्यकाल के दौरान, उन्होंने विश्वविद्यालय में कई बड़े बदलावों को सफलतापूर्वक लागू किया। इनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 का क्रियान्वयन प्रमुख रहा। उन्होंने स्नातक पाठ्यक्रमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए। विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया में सुधार लाने पर विशेष ध्यान दिया गया। डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देना भी उनके कार्यकाल की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। इन कदमों से विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी। उनके नेतृत्व में दिल्ली विश्वविद्यालय ने शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ। यह दूसरा कार्यकाल विश्वविद्यालय के विकास की निरंतरता सुनिश्चित करेगा।
प्रमुख शैक्षणिक सुधार
योगेश सिंह के कार्यकाल में कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) की व्यवस्था लागू की गई। इस व्यवस्था ने विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया को अधिक एकीकृत और निष्पक्ष बनाया। इसके साथ ही, चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को भी विश्वविद्यालय में सफलतापूर्वक लागू किया गया। यह पाठ्यक्रम छात्रों को अधिक लचीलापन और बहु-विषयक शिक्षा प्रदान करता है। अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट प्रणाली को भी विश्वविद्यालय में अपनाया गया।