ऊर्जा और संसाधन संस्थान (टेरी) और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के साझा संस्थान ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटेड हैबिटेट असेसमेंट (गृह) परिषद का 16वां गृहा वार्षिक शिखर सम्मेलन का आयोजन इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजन बुधवार शुरू हुआ।
दो दिवसीय सम्मेलन की थीम निर्मित पर्यावरण में जलवायु कार्रवाई में तेजी लाना है। सम्मेलन में देश-विदेश के नीति निर्माताओं, विशेषज्ञ के साथ उद्योग जगत से जुड़े नामचीन हस्तियां शामिल हो रही हैं। पहले दिन का सम्मेलन का मुख्य विषय जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां और समाधान रहा। इस कार्यक्रम में अमर उजाला मीडिया पार्टनर की भूमिका निभा रहा है।
विशेषज्ञों ने कहा कि वैश्विक जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की 2030 की समय सीमा निकट आ रही है। वहीं, भवन और निर्माण क्षेत्र को कार्बन मुक्त करने का 2050 का लक्ष्य बड़ा होता जा रहा है। यह समिट जलवायु-लचीले विकास के अवसरों का पता लगाने के लिए एक मंच प्रदान करता है। इससे बढ़ती गर्मी, ऊर्जा की मांग और कार्बन उत्सर्जन के चक्र को तोड़ा जा सकता है। समिट के उद्घाटन के दौरान गृह परिषद की अध्यक्ष और टेरी की महानिदेशक डॉ. विभा धवन ने कहा, एक व्यापक मंच के रूप में यह सम्मेलन समावेशी, जलवायु बुनियादी ढांचे के निर्माण में विभिन्न हितधारकों को विचार-विमर्श की सुविधा प्रदान करता है।
इसका व्यापक उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से निपटने में प्रत्येक व्यक्ति और संगठन की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानने में सभी को एकजुट करना है। वहीं, गृह परिषद के उपाध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी व टेरी में सतत अवसंरचना कार्यक्रम के वरिष्ठ निदेशक संजय सेठ ने इस बात पर जोर दिया कि हर इमारत, प्रत्येक डिजाइन हमारे ग्रह के भविष्य को फिर से परिभाषित करने की शक्ति प्रदान करती है। निर्मित वातावरण में जलवायु कार्रवाई में तेजी लाना केवल एक लक्ष्य नहीं है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी भविष्य को आकार देना सामूहिक जिम्मेदारी है।
केवीएस और गृह के बीच हुआ समझौता
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के मिशन निदेशक अभय बाकरे ने कहा, भवन निर्माण क्षेत्र हमारी स्थिरता लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक के रूप में कार्य करने वाले सबसे आशाजनक क्षेत्रों में से एक है। रॉयल नॉर्वेजियन दूतावास की मिशन की उप प्रमुख और मंत्री सलाहकार मार्टीन आमदल बोथेम ने स्थायी समाधानों का समर्थन करने के लिए नॉर्वे की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। इस दौरान केवीएस स्कूलों में स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए गृह और केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस), शिक्षा मंत्रालय के बीच एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए।