बताया जा रहा है कि कुछ सालों से एनडीएमसी एरिया में जो पेड़ गिरे हैं, उनके स्थान पर नए पेड़ कम ही लगाए गए हैं। एनडीएमसी अफसरों के मुताबिक, मानसून के दौरान उन पेड़ों की जगह 5-10 सेंटीमीटर लंबे पेड़ तो अधिक से अधिक लगाए गए हैं। लेकिन पुराने टूटे पेड़ को बहुत कम ट्रांसप्लांट किया गया है।
हॉर्टिकल्चर विभाग के एक अफसर ने कहा कि बहुत से पेड़ को खाद-पानी देकर बचाने की पूरी कोशिश की जा रही है। पीपल और बरगद के पेड़ का ट्रांसप्लांट हो सकता है इसलिए इनका कई जगह पर ट्रांसप्लांट भी किया गया है।
एनडीएमसी अफसरों ने इन पौधों के बीमार होने पर कहा कि एरिया में पेड़ों को पानी नहीं मिलता है। मानसून के दौरान में होने वाली बारिश का पानी सीधे नाले में जाता है। इससे पौधों की जड़ों में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं जाता, जिससे पेड़ों की जड़ों में दीमक लग जाते हैं और जड़े कमजोर हो जाती है।