उत्तर-पश्चिमी जिले की शालीमार बाग थाना पुलिस की लापरवाही सामने आई है। मुकदमा दर्ज न करना पड़े, इससे बचने के लिए पुलिस ने 15 वर्ष की लड़की को बालिग यानि 18 वर्ष की बना दिया और मुकदमा दर्ज नहीं किया।
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने जब इस लड़की को बिहार से बरामद किया, तब जाकर शालीमार बाग थाना पुलिस के इस कारनामे का खुलासा हुआ। एफआईआर दर्ज नहीं होने पर अपराध शाखा ने बच्ची को डीडी इंट्री के आधार पर थाना पुलिस को सौंपा है। वहीं, शालीमाग बाग थाना प्रभारी ने एफआईआर दर्ज होने का दावा किया है।
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी सूत्रों के अनुसार, सिंघलपुर गांव, शालीमार बाग निवासी एक व्यक्ति की 15 वर्षीय बेटी 24 अगस्त की रात को गायब हो गई थी। आधार कार्ड में उनकी बेटी की जन्म तिथि एक जनवरी, 2008 लिखी हुई। इसके बावजूद शालीमार बाग थाना पुलिस ने डीडी इंट्री(98 ए) में लड़की की उम्र 18 वर्ष लिख दी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार अगर लड़की नाबालिग होती है तो पुलिस अपहरण आदि की एफआईआर दर्ज करती है और अगर गायब हुई लड़की की उम्र 18 वर्ष से ज्यादा है तो एफआईआर दर्ज नहीं की जाती। शालीमार बाग थाना पुलिस ने डीडी इंट्री कर पीछा छुड़ा लिया।
इस बीच दिल्ली पुलिस ने गायब हुई लड़की के बारे में सूचना देने वाले को 20 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा कर दी। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की साइबर सेल टीम ने ऑपरेशन मिलाप के तहत इस नाबालिग को बरामद कर लिया। स्थानीय शालीमार बाग थाना पुलिस मामले की जांच कर रही थी।
इस दौरान पीडि़ता का पता लगाने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। साइबर सेल पुलिस टीम ने नाबालिग लड़की को थाना डुमरा, जिला सीतामढ़ी, बिहार के क्षेत्र में लापता नाबालिग का पता लगाया। इसके बाद पुलिस ने वहां से लड़की को बरामद कर लिया।
साइबर सेल टीम ने डीडी एंट्री पर किया पेश
पुलिस के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि गायब हुई नाबालिग लड़की के गायब होने की शालीमार बाग थाने में प्राथमिकी दर्ज नहीं थी। ऐसे में साइबर सेल टीम ने बच्ची को शालीमार थाना पुलिस के हवाले डीडी इंट्री के आधार पर सौंपा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में एफआईआर होनी चाहिए थी।
एफआईआर दर्ज की
इस मामले में उत्तर-पश्चिमी जिला पुलिस उपायुक्त जितेंद्र मीगा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह पता करके बताएंगे। मगर देर शाम तक उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। वह शालीमार बाग थाने के थानाध्यक्ष सुधीर कुमार का कहना है कि उन्होंने बच्ची के गायब होने की प्राथमिकी दर्ज की है। उन्होंने प्राथमिकी का नंबर 610/23 है।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि अगर एफआईआर दर्ज होती तो अपराध शाखा लड़की को एफआईआर के आधार पर थाना पुलिस को सौंपती। पुलिस सूत्रों ने दावा किया है कि लड़की के मिलने तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।