देश की राजधानी दिल्ली अपनी बुनियादी जरूरत पेयजल के लिए लगभग पूरी तरह से पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के अनुसार, रोजाना राजधानी में सप्लाई होने वाले कुल पानी का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा और उत्तराखंड से प्राप्त होता है। स्थानीय जल स्रोतों की सीमित उपलब्धता के कारण बढ़ती आबादी की जरूरतें पूरी करना दिल्ली के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है, जिससे बाहरी जल आपूर्ति पर निर्भरता और गहराती जा रही है।
नलों से बहती बदहाली पर प्रशासन मौन
राजधानी के कई इलाकों में पानी लोगों की प्यास बुझाने वाला नहीं, बल्कि उनकी सेहत और जिंदगी के लिए खतरा बनता जा रहा है। मोहन गार्डन, नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया, महावीर एन्क्लेव, कालकाजी और आली गांव जैसे इलाकों में रहने वाले सैकड़ों परिवार बदबूदार, पीले और काले पानी के सहारे जिंदगी जीने को मजबूर हैं। हालात इतने खराब हैं कि न यह पानी पीने लायक है, न खाना बनाने और न ही नहाने-धोने के काम का।
दिल्ली के लिए मुसीबत बन रहा गंदा पानी
गंदे पानी पीने के कारण कॉलोनी में कई लोग स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। हम टैक्स देते हैं, फिर भी हमें साफ पानी नहीं मिल रहा। नल खोलते ही बदबूदार पानी निकलता है। बच्चों को यह पानी पिलाने से डर लगता है, लेकिन करें तो क्या करें। मजबूरी में वही पानी इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
-कृपाल दत्त जोशी, मोहन गार्डन ए एक्सटेंशन
नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया में जो पानी आ रहा है उसे देखकर लगता है नाले का पानी है। बदबू इतनी होती है कि पानी को हाथ लगाने में भी डर लगता है। शिकायत करने पर भी सिर्फ आश्वासन मिलता है, समाधान नहीं। कालकाजी में तो पानी इतना गंदा है कि लोग पीना तो दूर, उसे घर में रखने से भी परहेज कर रहे हैं।
-निशा, कर्मचारी
महावीर एन्क्लेव से आली गांव तक स्वच्छ जल के लिए संघर्ष
महावीर एन्क्लेव और आली गांव में भी तस्वीर कुछ अलग नहीं है। महावीर एन्क्लेव स्थित नंदा ब्लॉक के लोग पिछले एक साल से पानी की कमी और स्वच्छ जल के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कॉलोनी में मीठा पानी सप्लाई नहीं होने से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। स्थानीय निवासियों के मुताबिक गंदे पानी की वजह से बच्चों और बुजुर्गों की तबीयत खराब हो रही है। स्थानीय निवासियों के मुताबिक शिकायत करने वालों को सिर्फ तारीख पर तारीख दी जा रही है। सबसे ज्यादा परेशानी गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को हो रही है।
पब्लिक बोली, टैंकर के सहारे गुजर रही जिंदगी
पिछले एक साल से मीठा पानी नहीं आ रहा है। हर महीने टैंकर मंगवाने पर काफी पैसे खर्च हो जाते हैं, जो हर परिवार के लिए संभव नहीं है। पानी की कमी के कारण साफ सफाई पर भी असर पड़ रहा है। नहाने, कपड़े धोने और बर्तन साफ करने तक में परेशानी होती है।
-रिंकी भंडारी, पालम कालोनी, नंदा ब्लॉक
पानी की समस्या के कारण कई परिवारों के लिए खाना बनाना, बर्तन धोना, कपड़े साफ करना और नहाने जैसी बुनियादी जरूरतें भी अब चुनौती बन गई हैं। इस कारण महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्हें पानी के लिए निजी टैंकर पर निर्भर रहना पड़ता है।
-महेश शर्मा, आली गांव