दिल्ली वासियों को नसरत और चारित्रिक पतन के खिलाफ खड़ा करने के लिए दिल्ली सरकार एक समग्र सांस्कृतिक नीति बनाने की तैयारी कर रही है। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सोमवार को दिल्ली सांस्कृतिक नीति सलाहकार समिति की पहली ऑनलाइन बैठक में इस बात की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सच को सच कहने की सबसे ज्यादा ताकत कला संस्कृति में है। हम इस नई सांस्कृतिक नीति के जरिए शहर के सोचने का मिजाज बदलना चाहते हैं।
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि समाज को नफरत और चारित्रिक पतन के खिलाफ खड़ा करने में कला और संस्कृति को अपनी भूमिका निभानी होगी। मनीष सिसोदिया ने कहा कि हम दिल्ली में ऐसा सांस्कृतिक माहौल बनाना चाहते हैं, जहां हर दिन कुछ अच्छी गतिविधियां हों। जिस तरह लोग अपने मेहमानों को सिनेमा घर और रेस्टोरेंट ले जाते हैं, उसी तरह अब दिल्ली के लोगों के पास सांस्कृतिक कार्यक्रमों में जाने के कई विकल्प होंगे। यह एक बड़ा सपना है, जिसे साकार करने के लिए एक सांस्कृतिक नीति बनाई जा रही है। इसके लिए दिल्ली सरकार के कला संस्कृति और भाषा विभाग ने पंद्रह सदस्यीय समिति सलाहकार समिति बनाई है। यह दो माह के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी। सरकार पूरी राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ इसे लागू करेगी।
दिल्ली को सांस्कृतिक राजधानी के तौर ऊपर लाने की जरूरत : मनोज वाजपेयी
इस बैठक में शामिल अभिनेता मनोज वाजपेयी ने कहा कि लंबे समय से उनका सपना है कि अगर किसी सरकार से नजदीकी रिश्ता हो, तो वह स्कूलों में थिएटर की शिक्षा लागू करने की सलाह देना चाहते हैं। झुग्गियों और बेसहारा बच्चों को भी थियेटर शिक्षा के माध्यम से मुख्यधारा में लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पेरिस में हर चौक चौराहे और मेट्रो के समीप नृत्य संगीत के कार्यक्रम होते रहते हैं। दिल्ली में भी ऐसे कलाकारों को कला प्रदर्शन के लिए जगह मिलनी चाहिए। ताकि दिल्ली को सांस्कृतिक राजधानी के तौर पर और ऊपर लाया जा सके।
नई सांस्कृतिक समिति में कई दिग्गज शामिल
दिल्ली सरकार के कला संस्कृति और भाषा विभाग ने 22 सितंबर 2020 को 15 सदस्यीय समिति के गठन का आदेश जारी किया था। जिसकी सलाहकार समिति में कला-संस्कृति की हस्तियों व विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इनमें अभिनेता मनोज वाजपेयी, जावेद जाफरी, कला नीति विशेषज्ञ पूजा सूद, जेएनयू के स्कूल ऑफ आर्ट्स और सौंदर्य शास्त्र की प्रोफेसर ईरा भास्कर, दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट के प्रिंसिपल अश्विनी कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता विनीत नागर, लोक नृत्यांगना बीना व्यास, संगीत प्रोड्यूसर बृन देसाई, कला विशेषज्ञ अभिनंदिता दयाल माथुर, कलाकार व शोधकर्ता भगवती प्रसाद, लतिका गुप्ता, कलाकार शिक्षाविद आस्था चौहान समिति में शामिल हैं।