दिल्ली की अदालत ने तबलीगी जमात के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेकर वीजा के नियमों, दिशा-निर्देशों की कथित अवहेलना करने के आरोपी 62 मलेशियाई नागरिकों को 7 हजार और 11 सऊदी नागरिक को 10 हजार रुपये के जुर्माने पर शुक्रवार को जमानत दे दी।
आरोपियों के वकील ने जानकारी दी कि मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सिद्धार्थ मलिक ने मलेशियाई नागरिकों द्वारा अपराध स्वीकार कर समझौता आवेदन (प्ली बार्गेनिंग एप्लिकेशन) करने पर यह आदेश जारी किया है।
वरिष्ठ वकील एस हरि हरन ने बताया कि मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट आशीष गुप्ता ने सऊदी अरब के नागरिकों द्वारा अपराध स्वीकार करने और समझौता आवेदन करने के संबंध में आदेश जारी किया।
इन आरोपियों ने अदालत में अपना अपराध स्वीकार कर समझौता आवेदन (प्ली बार्गेनिंग एप्लिकेशन) किया था। इस तरह के आवेदन के तहत आरोपी अपना दोष स्वीकार कर लेता है और कम दंड देने की याचना करता है।
दंड प्रक्रिया संहिता के तहत जिन मामलों में अधिकतम सजा सात वर्ष है, जो अपराध समाज की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को प्रभावित नहीं करते हों और जो अपराध महिला अथवा 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चे के खिलाफ न हों, उनमें समझौता आवदेन देने की इजाजत होती है।
82 बांग्लादेशी नागरिक को भी मिली जमानत
दिल्ली की अदालत ने तबलीगी जमात के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेकर वीजा के नियमों, दिशा-निर्देशों की कथित अवहेलना करने के आरोपी 82 बांग्लादेशी नागरिकों को शुक्रवार को जमानत दी। इन पर वीजा नियमों का कथित उल्लंघन करने के अलावा कोविड-19 के मद्देनजर जारी सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने और मिशनरी गतिविधियों में गैरकानूनी तरीके से शामिल होने के भी आरोप हैं।
मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट गुरमोहिना कौर ने प्रत्येक विदेशी को 10,000-10,000 रूपये के निजी मुचलके पर यह राहत दी। विदेशी नागरिकों की ओर से पेश वकील आशिमा मंडला और मंदाकिनी सिंह ने बताया कि आरोपी शुक्रवार को समझौता आवेदन (प्ली बार्गेनिंग एप्लिकेशन) देंगे। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई सुनवाई के दौरान सारे विदेशी नागरिक अदालत के समक्ष पेश किए गए थे।