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Delhi: वांगचुक के अस्पताल जाते ही छात्र आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार, अनशन टूटने पर भी कम न हुआ उत्साह

Sun, 26 Jul 2026 06:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को 21वें दिन अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद प्रदर्शन स्थल पर भीड़ उमड़ी।
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सोनम वांगचुक, सामाजिक कार्यकर्ता - फोटो : ANI
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विस्तार
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काॅकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) आंदोलन के कामयाबी की तरफ बढ़ने की रफ्तार प्रदर्शन ने 28वें दिन तेज हुई। अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को 21वें दिन अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद प्रदर्शन स्थल पर भीड़ उमड़ी। आंदोलन का स्वरूप और दायरा दोनों व्यापक हो गया। जबकि इससे पहले मौके पर लोगों की भागीदारी सीमित दिखी। दिलचस्प यह कि बृहस्पतिवार देर रात अनशन टूटने के बाद भी लोगों का जोश कम नहीं हुआ। 

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शुक्रवार दिन भर जंतर मंतर से जुड़ी सभी सड़कों पर लोगों की लाइन लगी रही। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के साथ आंदोलन केंद्र सरकार से अपनी मांगें पूरी करवाने के बाद ही शनिवार थमा। दरअसल, नीट परीक्षा में पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जून से काकरोच जनता पार्टी ने जंतर मंतर पर आंदोलन की शुरुआत की थी।

लगातार 20 दिनों तक अनशन करने से उनकी सेहत गिरती जा रही थी। वहीं, 20 जुलाई को सीजेपी ने संसद मार्च का आह्वान भी कर रखा था। इसको देखते हुए दिल्ली पुलिस नाटकीय अंदाज में वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवाया। पुलिस से सफेद चादर से ढककर उनको प्रदर्शन स्थल से हटाया। 
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पुलिसिया कार्रवाई के बावजूद भी लोगों का नहीं थमा उत्साह
आंसू गैस और लाठीचार्ज की कार्रवाई भी लोगों के हौसले को नहीं तोड़ सकी। शाम जंतर मंतर से प्रदर्शनकारियों का मंच हटा देने के बाद देर रात तक दोबारा वह जंतर मंतर पहुंच गए। मंगलवार को भी लोगों की भारी भीड़ जंतर मंतर पर दिखी। बुधवार व बृहस्पतिवार लुटियंस दिल्ली के ज्यादातर मेट्रो स्टेशन बंद होने के बावजूद हुजूम कम नहीं हुआ।

जंतर मंतर के साथ संसद मार्ग, टॉलस्टाय मार्ग, जनपथ पर हर तरफ आंदोलनकारी दिख रहे थे। पूरा इलाका शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के मांग के नारे से गूंजता रहा। इसमें छात्रों के अलावा नौकरीपेशा, बुजुर्ग से लेकर बच्चे तक शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों की बढ़ती भीड़ के बीच से यह बात भी उठी कि अब मुद्दा सिर्फ कुछ परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक जन समर्थन प्राप्त कर चुका है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन और अधिक मुखर रूप ले सकता है, और सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। 

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