स्मार्टफोन और इंटरनेट के चलते दिल्ली में मोबाइल रखने वालों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है। आंकड़ों के मुताबिक हर घर में 11 फोन कनेक्शन हैं। अगर परिवार की बात करें तो उनके हिस्से में 15 फोन कनेक्शन आ रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि राजधानी में करीब 3.13 लाख मकानों में शौचालय की सुविधा नहीं है।
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उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बृहस्पतिवार को दिल्ली सांख्यिकी पुस्तिका 2016 जारी की है। इसमें ये आंकड़े सामने आए हैं। मोबाइल फोन की दीवानगी इस कदर है कि महज 9 महीने में 17 लाख नए कनेक्शन लिए गए हैं, जबकि लैंडलाइन की संख्या एक साल में महज 15 हजार बढ़ी है।
मार्च, 2015 तक 4.61 करोड़ मोबाइल कनेक्शन था, जो दिसंबर, 2015 तक 4.78 करोड़ हो गया है। वहीं लैंडलाइन के 31.56 लाख की संख्या जोड़ लें तो 5.10 करोड़ मोबाइल व लैंडलाइन फोन कनेक्शन दिल्ली के खाते में दर्ज हैं।
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शराब पर भी पैसा खर्च करने में आगे है दिल्ली
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शराब पर पैसा खर्च करने के मामले में भी दिल्ली बहुत आगे है। दिल्ली में वित्त वर्ष 2015-16 में 2.68 करोड़ पेटी भारत में निर्मित विदेशी शराब, देसी शराब और बीयर की बिक्री हुई। पिछले साल 16.10 लाख पेटी कम थी।
वहीं आंकड़े बताते रहे हैं कि सिनेमाघरों में जाने वालों की संख्या 2014 के मुकाबले 2015 में थोड़ी कम हुई है। मल्टीप्लेक्स में वृद्धि के बावजूद दैनिक सिनेमा देखने वाले 3 हजार कम हुए हैं।
फैक्ट फाइल
दिल्ली की प्रतिव्यक्ति आय 2,80, 142 है जो राष्ट्रीय प्रतिव्यक्ति आय 93,293 से करीब तीन गुना है।
बिजली कनेक्शनधारी उपभोक्ताओं की संख्या 2014-15 के 50.44 लाख के मुकाबले बढ़कर 52.63 लाख पहुंच गई है।
पानी का कनेक्शन एक साल में 18.63 लाख से बढ़कर 19.49 लाख पहुंच गई है।
दिल्ली में स्कूल की संख्या वित्त वर्ष 2015-16 में 5796 है, जिसमें 44.31 लाख बच्चे पढ़ते हैं। ये संख्या वित्त वर्ष 2014-15 में 44.13 लाख थी।
दिल्ली में 4.08 लाख लोग वृद्धावस्था पेंशन ले रहे हैं और लाडली योजना में 1.74 लाख लड़कियां पंजीकृत हैं।
दिल्ली सरकार के स्कूलों में बढ़ी छात्रों की संख्या
दिल्ली के सरकारी स्कूल में बढ़ी बच्चों की संख्या
- फोटो : इंडियन एक्सप्रेस
दिल्ली सांख्यिकी पुस्तिका-2016 के मुताबिक दिल्ली सरकार के सीनियर सेकेंडरी स्कूल में छात्रों के पंजीकरण की संख्या बढ़ी है। 2014-15 में जहां 44.13 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया था, यह संख्या 2015-16 में बढ़कर 44.31 लाख पहुंच गई है। दिल्ली में सरकार के कुल 5,796 स्कूल है।
सांख्यिकी पुस्तिका-2016 के मुताबिक दिल्ली में 2013-14 और 2014-15 में कुल 5,453 और 5798 स्कूल थे। मगर इस वर्ष 2015-16 में इनकी संख्या 5,796 है। सरकार ने दो स्कूलों की जर्जर इमारत के चलते उसे बंद कर दिया था।
दिल्ली के स्कूलों में कुल पंजीकृत 44.31 लाख छात्रों में 23.56 लाख लड़के और 20.75 लाख लड़कियां है। वहीं प्राइमरी स्कूल स्तर की बात करे तो दिल्ली में कुल 18.87 लाख बच्चों ने पंजीकरण कराया है। इसमें 10.07 लाख लड़के और 8.8 लाख लड़कियां हैं। 2014-15 की तुलना में इसमें भी इजाफा हुआ है, तब दिल्ली में कुल महज 18.75 लाख बच्चे थे।
राजधानी में एक साल में करीब दस लाख निजी वाहनों की संख्या बढ़ गई है। दिल्ली सरकार ने बृहस्पतिवार को दिल्ली सांख्यिकी पुस्तिका 2015-16 के आंकड़े जारी किए हैं। इसके मुताबिक 2014-15 में दिल्ली में कुल 88.27 लाख वाहन थे, 2015-16 में बढ़कर कुल 97.05 लाख हो गए हैं। माना जा रहा है कि डीटीसी बसों की घटती संख्या के चलते लोग निजी वाहन खरीदने में रुचि ले रहे हैं।
दिल्ली सरकार की सांख्यिकी पुस्तिका 2016 के अनुसार दिल्ली में 4180 बसें हैं। 2014-15 में यह संख्या 4705 थी जो लगातार घट रही हैं। वर्तमान में कुल 4352 बसों में 3817 ऑपरेशनल हैं।
इसी का नतीजा है कि बसों की संख्या घटने के साथ यात्री भी घटते जा रहे हैं। बीते साल जहां बसों से 141.87 करोड़ लोगों ने सफर किया, वहीं इस वर्ष 129.44 करोड़ यात्रियों ने ही सफर किया है। रोज औसतन 35.37 लाख यात्री सफर कर रहे हैं।
सांख्यिकी पुस्तिका 2016 के मुताबिक दिल्ली में ऑटो रिक्शा की संख्या बढ़ी है। यह अब एक लाख के पास पहुंच गई है जो बीते 2014-15 में 81,633 थी। टैक्सी की संख्या भी बढ़ी है। 2015-16 में कुल 91,073 टैक्सी है वहीं 2014-15 में 79.06 हजार टैक्सी थी।
बस, मिनी बस और एंबुलेंस की संख्या में भी इजाफा हुआ है। 2015-16 में यह संख्या 43,723 है जबकि 2014-15 में यह संख्या 32,606 थी। वाहनों के रजिस्ट्रेशन में भी बढ़ोतरी हुई है।
दिल्ली में कुल 29.87 लाख रजिस्टर्ड कार व जीप हैं। 2014-15 में यह संख्या 27.9 लाख थी। सांख्यिकी पुस्तिका 2016 के मुताबिक 2015-16 में कुल 8.77 लाख वाहन रजिस्टर्ड हुए हैं। इसमें चार लाख दोपहिया वाहन भी शामिल है।