दिल्ली की विशेष अदालत ने कहा कि आपराधिक आय अर्जित करने या अनुचित लाभ की आशंका को मनी लॉन्ड्रिंग नहीं कहा जा सकता। इस टिप्पणी के साथ अदालत ने ओडिशा के कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आधुनिक कॉरपोरेशन लि. (एसीएल) और उसके दो निदेशकों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का आरोपपत्र खारिज कर दिया।
विशेष जज अरुण भारद्वाज ने कंपनी और उसके तत्कालीन निदेशकों महेश कुमार अग्रवाल और निर्मल कुमार अग्रवाल को राहत दे दी। ईडी ने आरोपपत्र में दावा किया था कि आरोपियों के परिवार के सदस्यों और समूह की कंपनियों ने कोयला ब्लॉक आवंटन में अनुचित लाभ हासिल करने की उम्मीद से एसीएल में शेयर निवेश की आड़ में 50.37 करोड़ रुपये डाले।
इस पर जज ने कहा, ईडी का मानना है कि एसीएल में होल्डिंग कंपनी के जरिये निवेश कोयला ब्लाक आवंटन के बाद अनुचित लाभ की उम्मीद में किया गया। ईडी के इस दावे से ही साफ है कि अनुचित लाभ अभी मिला नहीं था, केवल अनुमान लगाया गया था।
अभी आपराधिक आय अस्तित्व में भी नहीं आई। आपराधिक आय प्राप्त करने या अनुचित लाभ लेने का प्रयास मनी लॉन्ड्रिंग की परिभाषा के तहत नहीं माना जा सकता, क्योंकि मनी लॉन्ड्रिंग के लिए कोई धन उपलब्ध ही नहीं था।
साजिश रचे जाने से पहले हुआ निवेश
विशेष जज ने कहा, ईडी के मुताबिक अपराध करने की तैयारी थी, इसकी साजिश रची जा रही थी, लेकिन तब तक अपराध हुआ नहीं था और साजिश रचे जाने से पहले ही निवेश किया जा चुका था।
निवेशक आरोपी के परिवार के सदस्य और समूह की कंपनियां थीं। ऐसा कोई निवेशक नहीं था, जिसने कोयला ब्लॉक के आवंटन के कारण एसीएल में निवेश किया हो।
जब परिवार के सदस्य और समूह की कंपनियां किसी ऐसी कंपनी के शेयरों में निवेश करती हैं, जिसने धोखाधड़ी कर कोयला ब्लॉक का आवंटन हासिल किया है, तो उनका निवेश अपराध की आय की परिभाषा के दायरे में नहीं आएगा।
अपराध से जुड़ा नहीं था निवेश...
ओडिशा में न्यू पात्रा पारा कोल ब्लॉक का आवंटन होने से पहले ही निवेश शुरू था और आवंटन प्रक्रिया रद्द होने के बाद भी निवेश किया जाता रहा। साफ है कि निवेश अपराध से जुड़ा नहीं था।
-विशेष जज
- इस मामले में सीबीआई ने भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया था, जिसमें फर्जी दस्तावेज के जरिये कोल ब्लॉक हासिल करने का आरोप लगाया था।