दिल्ली सरकार के पास अपनी कोई वन नीति नहीं है। 2007-08 के बाद से दिल्ली की हरियाली के लिए कोई नीति भी नहीं बनाई गई है। दिल्ली सरकार की वन नीति को लेकर शनिवार को सरोजनी नगर में नागरिक संगठनों ने नियंत्रक और महालेखा-परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के आधार पर कई सवाल उठाए।
कैग रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पेड़ संरक्षण कानून, 1947 के तहत पेड़ प्राधिकरण बनाया गया था। इस प्राधिकरण ने 2014-17 के दौरान सिर्फ एक बार बैठक की है। जबकि इस प्राधिकरण को अनिवार्य तौर पर करीब 12 बैठकें आयोजित करनी थीं। सीएजी की इस रिपोर्ट के आधार पर पेड़ों की कटाई को मंजूरी सरकार के जरिए कैसे दी गई इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
नागरिक संगठनों का कहना है कि राजधानी में मौजूद सैकड़ों वर्ष पुराने पेड़ों को परियोजनाओं के नाम पर काटा जा रहा है, लेकिन इनकी भरपाई भी इमानदारी से नहीं की जा रही है। दिल्ली सरकार ने 2014-17 के बीच 28.12 लाख पौधरोपण ही किया। जबकि लक्ष्य 36.57 लाख पौधों को लगाने का था। यानी लक्ष्य से करीब 23 फीसदी कम (8.45) ही पौधरोपण हुआ। यह सरकार के पौधरोपण कार्यक्रम की संजीदगी पर भी सवाल उठाता है। प्रदर्शन में पर्यावरणविद अनिल सूद, विक्रांत तोंगड़, पद्मावती द्विवेदी, ज्योति राघवन, अनिल पराशर, बिल्ली गुप्ता व अन्य मौजूद थे।