कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में डॉक्टर की हत्या के विरोध में जारी हड़ताल से ओपीडी में मरीजों की संख्या घटकर 20 फीसदी तक पहुंच गई है। इलाज न मिल पाने से अधिकतर मरीज आपातकालीन सुविधाओं का सहारा ले रहे हैं जबकि बड़ी संख्या में गंभीर मरीज दूसरे राज्य या निजी अस्पतालों में शिफ्ट हो गए।
एम्स में सोमवार को 5766 मरीजों ने ओपीडी में इलाज करवाया। यह कुल क्षमता का 45 फीसदी है। वहीं सर्जरी की बात करें तो 85 फीसदी सर्जरियां प्रभावित हुईं। हड़ताल के दौरान सोमवार को भी रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने ओपीडी, प्रस्तावित सर्जरी सहित अन्य सुविधाओं को बाधित किया, लेकिन आपातकालीन सुविधाएं सहित इमरजेंसी सर्जरी जारी रखी। डॉक्टरों की माने तो सोमवार को रक्षाबंधन का त्यौहार होने के कारण अस्पतालों में राहत रही।
एम्स, सफदरजंग, डॉ. राम मनोहर लोहिया, लेडी हार्डिंग, जीटीबी, डीडीयू, लोकनायक सहित दूसरे अस्पतालों में ओपीडी की संख्या 20 से 30 फीसदी रही। इन मरीजों का इलाज फैकल्टी ने किया। डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक, सोमवार को ओपीडी में 1736 मरीज इलाज करवाने आए। इनमें से 723 नए मरीज थे, जबकि 1013 मरीज फॉलोअप के लिए आए थे। सबसे ज्यादा 258 मरीज मेडिसिन विभाग में इलाज करवाने आए।
सड़क पर चली ओपीडी
एम्स, सफदरजंग सहित दूसरे मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने सोमवार को दूसरी बार निर्माण भवन का घेराव किया। इस दौरान एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों ने सड़क पर इलेक्टिव ओपीडी चलाई। निर्माण भवन के पास आए जरूरतमंद लोगों की जांच की गई, साथ ही दवाएं लिखीं। डॉक्टरों ने कहा कि हम विरोध प्रदर्शन जरूर कर रहे हैं लेकिन मरीजों का इलाज भी कर रहे हैं। अस्पतालों में आपातकालीन सुविधाएं चल रही हैं। ओपीडी में फैकल्टी इलाज कर रही है। विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे डॉक्टरों का कहना है कि हम केवल सुरक्षित माहौल मांग रहे हैं। यह मांग पूरी होते ही हड़ताल खत्म हो जाएगी।
नहीं बन पा रही पर्ची, बढ़ गया इंतजार
एम्स में आए मरीजों ने बताया कि हड़ताल से पहले टोकन लेकर भी पर्ची बन जाती थी। हड़ताल शुरू होने के बाद से टोकन मिलना बंद हो गया है। अब केवल उन्हीं मरीजों को देखा जा रहा है जिनके पास फैकल्टी की पर्ची या अपॉइंटमेंट हो। वहीं जिन मरीजों के पास सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर की पर्ची है, उन्हें दिखाने का मौका नहीं मिल पा रहा है।
मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं
सुरक्षा की मांग को लेकर हड़ताल कर रहे डॉक्टरों की सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के साथ दूसरी बैठक भी बेनतीजा रही। डॉक्टरों की निगाहें अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिक गई हैं। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई होनी है। कोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। डॉक्टरों की संगठन फाइमा से अध्यक्ष डॉ. रोहन कृष्णन का कहना है कि निर्माण भवन में हुई बैठक में अपनी मांगें रखीं। इन मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ।