पटियाला में जलती पराली।
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पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने को लेकर क्लाइमेट ट्रेंड्स ने एक नया विश्लेषण किया है। इससे पता चला है कि पिछले साल की तुलना में इस साल एक अक्तूबर से पांच नवंबर के बीच पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में 48 फीसदी और हरियाणा में 38 फीसदी कमी आई है। इसके बावजूद दिल्ली एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण बढ़ रहा है। अध्ययन के अनुसार, पंजाब में इन घटनाओं में सबसे ज्यादा गिरावट संगरूर में दर्ज की गई है। यहां इस अवधि में पिछले साल की तुलना में पराली जलाने की घटनाओं में करीब 46 फीसदी गिरावट देखी गई। 2022 में इनकी तादाद 4,287 थी, जबकि 2023 में 2,295 रह गई।
यह हैं महत्वपूर्ण वजहें
वाहनों, फैक्टरियों, डीजल जनरेटरों, बिजली संयंत्रों, सड़क की धूल, निर्माण व घरों का उत्सर्जन दिल्ली व एनसीआर के प्रदूषण में इजाफा करता है। पराली का धुंआ हवा के साथ जहरीले प्रदूषकों को लाता है। मौसम इसके प्रतिकूल हो तो प्रदूषण का स्तर बढ़ता है और हवा कहीं ज्यादा घातक हो जाती है। ऐसा ही कुछ इस समय भी हो रहा है।
पंजाब-हरियाणा से आने वाली तेज हवा कारण
अध्ययन के दौरान हवा के बहने के डाटा के विश्लेषण से पंजाब और हरियाणा से आने वाली हवा और दिल्ली में प्रदूषण स्तर के बीच मजबूत संबंध का पता चलता है। अक्तूबर 2023 में 81 प्रतिशत समय हवा ने इन राज्यों से प्रदूषण को दिल्ली तक पहुंचाया। क्लाइमेट ट्रेंड्स की निदेशक आरती खोसला का कहना है कि विश्लेषण के मुताबिक, इस प्रदूषण के कारक हवा के बहाव की गति, पराली का जलना, सालभर की गतिविधियां, मौसम का पैटर्न आदि हैं। दिल्ली को प्रभावित करने वाली 81 प्रतिशत हवा पंजाब और हरियाणा से आती हैं। इस बार इन राज्यों से पराली जलाने के आंकड़ों में भारी कमी है, लेकिन वहां आने वाली हवा की मात्रा इतनी ज्यादा है कि वह दिल्ली की वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर देती है।
हरियाणा में भी बदले हालात
यहां खेतों में पराली जलने की घटनाओं में 38 फीसदी गिरावट दर्ज की गई। एक अक्तूबर से पांच नवंबर 2022 के बीच कैथल के खेतों में पराली जलाने के 591 मामले दर्ज हुए थे, जबकि इस बार यह 68 फीसदी गिरावट के साथ केवल 189 रह गए। फतेहाबाद में यह मामले 496 से घटकर 312 रह गए।
नासा के उपकरणों व सीपीसीबी से ली मदद
इस विश्लेषण में शोधकर्ताओं ने खेतों में जल रही पराली की जानकारी के लिए नासा के विजिबल इन्फ्रारेड इमेजिंग रेडियोमीटर सुइट उपकरण की मदद ली है। तापमान व हवा की जानकारी के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों का उपयोग किया गया।
हवा फिर गंभीर श्रेणी में पहुंची
मौसम के बदलाव व हवा की गति कम होने से दिल्ली में हवा एक बार फिर गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है। बुधवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 426 दर्ज हुआ। यह मंगलवार की तुलना में 31 अंक ज्यादा है। भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के मुताबिक, बुधवार को हवा उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर से आठ से 12 किमी प्रतिघंटे गति से चली। दोपहर व शाम के समय हवा की दिशा बदलने और गति कम होने से प्रदूषण बढ़ गया। बृहस्पतिवार को हवा उत्तर-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा से 12 किमी प्रतिघंटे गति से चलने का अनुमान है। ऐसे में गुणवत्ता बेहद गंभीर श्रेणी में पहुंचने का अनुमान है। सुबह के समय धुंध के साथ कोहरा छाने की आशंका है। शनिवार को हवा उत्तर से उत्तर-पूर्व चलेंगी। साथ ही, कुछ जगहों पर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है।