-21 माह में निर्माण का लक्ष्य, दिल्ली सरकार को पहली बार मिलेगा अपना समर्पित राज्य अतिथि गृह
-वर्षा जल संचयन, जल शोधन की होगी व्यवस्था, इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग सुविधा भी मिलेगी
संदीप वर्मा
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार का प्रस्तावित ट्विन टावर ‘दिल्ली सदन’ आधुनिक सुविधाओं के साथ राजधानी की ऐतिहासिक स्थापत्य विरासत की झलक भी पेश करेगा। द्वारका सेक्टर-19 में बनने वाले इस दस मंजिला भवन के निर्माण के लिए दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (डीटीटीडीसी) ने निविदा जारी की है। परियोजना पर 119.70 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इसे 21 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
दिल्ली सदन राजधानी में दिल्ली सरकार का पहला समर्पित राज्य अतिथि गृह होगा। यहां देश-विदेश से आने वाले सरकारी प्रतिनिधिमंडलों, गणमान्य अतिथियों और अधिकारियों के ठहरने के साथ आधिकारिक बैठकें, सम्मेलन और अन्य सरकारी कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे। इससे ठहरने, खानपान और बैठकों की व्यवस्था एक ही परिसर में उपलब्ध होगी।
दो टावरों के बीच होगा खुला आंगन
प्रस्तावित भवन का कुल निर्मित क्षेत्र लगभग 15,984 वर्गमीटर होगा। इसकी डिजाइन में दो बेसमेंट, भूतल, अपर ग्राउंड फ्लोर, सर्विस फ्लोर, पोडियम, छह ऊपरी मंजिलें और छत शामिल हैं। परिसर को दो टावरों के रूप में विकसित किया जाएगा। इनके बीच खुला आंगन और सार्वजनिक प्लाजा बनाने की योजना है, जिससे प्राकृतिक रोशनी और हवा का बेहतर आवागमन सुनिश्चित किया जा सके।
44 कमरे, सुइट और 500 वर्गमीटर का प्रदर्शनी हॉल
दिल्ली सदन में सम्मेलन हॉल, मीटिंग रूम और लगभग 500 वर्गमीटर का बहुउद्देशीय एवं प्रदर्शनी हॉल बनाया जाएगा। यहां 150 लोगों की क्षमता वाला डाइनिंग हॉल, रेस्त्रां और फूड कोर्ट भी होंगे। अतिथियों के ठहरने के लिए 44 कमरे और सुइट के अलावा 32 बिस्तरों वाली डॉर्मिटरी प्रस्तावित है। इनमें वीआईपी और वीवीआईपी सुइट भी शामिल होंगे। परिसर में क्राफ्ट बाजार, स्थानीय कलाकृतियों की दुकानें, ओपन प्लाजा और रूफटॉप कैफे व रेस्त्रां भी विकसित किए जाएंगे। दो बेसमेंट में 72 कारों की पार्किंग की व्यवस्था होगी। यहां इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
विरासत और पर्यावरण का संगम
भवन का डिजाइन पुरानी दिल्ली की वास्तुकला और नई दिल्ली की नियोजित शहरी संरचना से प्रेरित होगा। निर्माण में लाल बलुआ पत्थर, दिल्ली क्वार्टजाइट और हरियाली का इस्तेमाल किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन, अपशिष्ट जल शोधन एवं पुनः उपयोग और ऊर्जा दक्षता जैसे उपाय अपनाए जाएंगे। हवादार दीवारों, प्राकृतिक रोशनी और छायादार मुख्य आंगन पर भी जोर रहेगा।
संचालन से खर्च निकालने की तैयारी
परियोजना का उद्देश्य केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है। व्यय वित्त समिति ने इसके अधिकतम उपयोग और राजस्व जुटाने की योजना पर भी जोर दिया है। सरकारी कार्यक्रमों के अलावा सम्मेलन और अन्य गतिविधियां आयोजित कर संचालन एवं रखरखाव का खर्च निकालने की योजना है। निर्माण से रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है, जबकि इसके संचालन से खानपान, रखरखाव और अन्य सेवाओं से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।