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Delhi: दिल्ली के रेलवे ट्रेक की होगी डीप स्क्रीनिंग, आधुनिक मशीनों और लेवल क्रॉसिंग सुधार से हादसे होंगे कम

Tue, 31 Mar 2026 07:49 AM IST
Vijay Singh Pundir शनि पाथौली, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

परियोजना के तहत ट्रैक सुधार, डीप स्क्रीनिंग और मशीन आधारित मेंटेनेंस कार्य होंगे। इसके लिए अत्याधुनिक मशीनों जैसे टी-28, शोल्डर बैलास्ट क्लीनिंग मशीन (एसबीसीएम) और री-स्लीपरिंग मशीन (एफआरएम) का उपयोग होगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राजधानी में रेलवे ट्रैक के आधुनिकीकरण और रखरखाव को लेकर बड़े स्तर पर सुधार कार्य शुरू होने की तैयारी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत ट्रैक की मजबूती बढ़ाने, सुरक्षा सुनिश्चित करने और ट्रेनों की सुचारु आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों और मशीनों का इस्तेमाल होगा। इसको लेकर निविदा प्रक्रिया भी जारी की है।

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परियोजना के तहत ट्रैक सुधार, डीप स्क्रीनिंग और मशीन आधारित मेंटेनेंस कार्य होंगे। इसके लिए अत्याधुनिक मशीनों जैसे टी-28, शोल्डर बैलास्ट क्लीनिंग मशीन (एसबीसीएम) और री-स्लीपरिंग मशीन (एफआरएम) का उपयोग होगा। इन मशीनों की मदद से ट्रैक के नीचे मौजूद बैलास्ट (पत्थर की परत) की गहराई तक सफाई की जाएगी, जिससे ट्रैक की स्थिरता और मजबूती में सुधार होगा। साथ ही, प्वाइंट्स और क्रॉसिंग की मरम्मत भी की जाएगी, जो ट्रेनों के सुरक्षित संचालन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

टर्नआउट्स की डीप स्क्रीनिंग पर खास जोर
योजना का मुख्य फोकस टर्नआउट्स की डीप स्क्रीनिंग पर रहेगा। टर्नआउट्स वे स्थान होते हैं जहां ट्रेन एक ट्रैक से दूसरे ट्रैक पर जाती है, इसलिए इनकी स्थिति मजबूत होना बेहद जरूरी है। डीप स्क्रीनिंग के दौरान पुराने बैलास्ट को निकालकर छाना जाएगा और नई परत बिछाई जाएगी। इसके बाद ट्रैक को सही स्तर पर दोबारा स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा ट्रैक की पैकिंग, एलाइनमेंट सुधार और फिटिंग्स की मरम्मत भी की जाएगी, जिससे ट्रेनों की गति को सुरक्षित रूप से बढ़ाया जा सके।

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लेवल क्रॉसिंग सुधार पर भी विशेष ध्यान
रेलवे लेवल क्रॉसिंग के सुधार पर भी विशेष ध्यान देगा। सड़क और रेल के मिलन बिंदुओं पर बैलास्ट की सफाई, खराब स्लीपरों को बदलना और सड़क सतह को समतल बनाना शामिल होगा। इससे न केवल वाहनों की आवाजाही आसान होगी बल्कि दुर्घटनाओं की संभावना भी कम होगी। इसके साथ ही ट्रैक के किनारों पर उगी झाड़ियों और खरपतवार को हटाने का काम भी किया जाएगा, जिससे दृश्यता बेहतर होगी और रखरखाव कार्य में सुविधा मिलेगी।

6 करोड़ की लागत से पूरी होगी परियोजना
प्रस्तावित परियोजना को करीब 6 करोड़ रुपये की लागत से 12 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रेलवे ने इस कार्य के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही है। जहां-जहां ट्रैक पर काम होगा, वहां ‘वॉचमैन’ तैनात होंगे, जो ट्रेनों को संकेत देकर सुरक्षित पारगमन सुनिश्चित करेंगे। रात के समय काम करने के लिए पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।

ट्रेनों लेटलतीफी में आएगी कमी, यात्रियों को होगा फायदा
दिल्ली जैसे व्यस्त रेल नेटवर्क में ट्रेनों की भारी आवाजाही के कारण ट्रैक पर दबाव अधिक रहता है। ऐसे में इस तरह के व्यापक रखरखाव कार्य बेहद जरूरी हो जाते हैं। ट्रैक की बेहतर स्थिति से जहां ट्रेनों की लेटलतीफी में कमी आएगी। इससे भविष्य में तेज गति वाली ट्रेनों के संचालन के लिए भी मजबूत आधार तैयार होगा।

रेलवे मशीन आधारित ट्रैक मेंटेनेंस को दे रहा बढ़ावा
रेलवे लगातार ट्रैक के रखरखाव और आधुनिकीकरण पर जोर दे रहा है। इसके तहत दिल्ली सहित देशभर में मशीन आधारित ट्रैक मेंटेनेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है। दिल्ली में प्रमुखता से काम किया जा रहा है। साथ ही अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग के जरिए रेल पटरियों में आंतरिक दरारों का समय रहते पता लगाया जा रहा है, जिससे संभावित दुर्घटनाओं को टाला जा सके। इसके अलावा ट्रैक रिकॉर्डिंग कारों और ऑटोमेटेड सिस्टम के माध्यम से ट्रैक की स्थिति की नियमित निगरानी की जा रही है।
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