पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि बांग्लादेश से लोग इलाज करवाने के लिए भारत आते हैं। वह इन नागरिकों के लिए एजेंट का काम करते थे। कई लोग यहां पर किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट करवाने आते हैं। इस प्रक्रिया के लिए कई कागजातों की जरूरत होती है और विभिन्न प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। जांच में पता चला कि वहां से आने वाले लोग कागजात लेकर आते थे, लेकिन प्रक्रियाओं से गुजरने के दौरान कुछ कागजात कम होने पर लोग आरोपियों से संपर्क करते थे। इस दौरान आरोपी मरीजों का पासपोर्ट अपने पास रख लेते थे और उनके फर्जी कागजात तैयार कर दे देते थे। इसके एवज में वह संपर्क करने वाले लोगों से मोटी रकम हासिल करते थे। पैसा मिलने के बाद वह उन्हें पासपोर्ट वापस कर देते थे।
पुलिस अधिकारी का कहना है कि इस मामले में अस्पताल की भूमिका की भी जांच की रही है। आशंका है कि अस्पताल की मिलीभगत से आरोपी ठगी को अंजाम दे रहे हो। पुलिस अस्पताल से पूछताछ कर इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अब तक इन लोगों की मदद से कितने लोगों का अस्पताल में इलाज हो चुका है। पुलिस ने अस्पताल से इलाज करवाने वाले लोगों के कागजात मंगवाए हैं और इसकी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल की संलिप्तता आने पर उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।