2011-14 में पीएम 2.5 का स्तर 24 घंटों में मानक से 13-14 गुना ज्यादा रहता है। हालांकि, 2016 से 2018 के बीच मौसमी दशाओं से प्रदूषण ज्यादा था। इसके स्तर में कमी आई और यह मानक से 7-10 गुना के बीच सिमट गया।
गंभीर प्रदूषित दिनों की संख्या हुई कम
2011-2014 की सर्दियों में 33-52 दिन के बीच हवा की गुणवत्ता गंभीर स्तर पर रही। 2016-18 में यह आंकड़ा 20-34 के बीच आ गया। वहीं, गंभीर प्लस वाले दिनों की संख्या 2011-14 में 20-40 दिन व 2016 से 2018-19 में 15 दिन रह गई।
स्मॉग का पैटर्न बदला
इस बीच स्मॉग का पैटर्न भी बदला है। 2016 की सर्दियों में प्रदूषण का गंभीर स्तर 23 दिन तक रहा। इसमें से 16 दिन तक यह स्थिति लगातार बनी रही। 2017 व 2018 में प्रदूषण का लगातार गंभीर स्तर 6-9 दिन था। इनमें से स्मॉग की स्थिति 2-3 दिन रही।
सर्दियों में वायु प्रदूषण सूचकांक सुधरा
2011-2015 के बीच वायु गुणवत्ता सूचकांक के बहुत खराब स्तर पर जाने की शुरुआत अक्तूबर के पहले सप्ताह से हो गई थी। इन सालों में यह स्थिति फरवरी-मार्च तक बनी रही। इसमें भी बदलाव आया है। 2016, 2017 व 2018 में हवा 15-18 अक्तूबर के बीच इस स्तर पर पहुंची। यह स्थिति फरवरी के पहले सप्ताह तक बनी रही।
गर्मियों की स्थिति भी हुई बेहतर
गर्मी व मानसून में बेहतर वायु गुणवत्ता सूचकांक वाले दिनों की संख्या बढ़ी है। 2011 में 40 दिन में सूचकांक मानक स्तर पर था। 2012 में संख्या 7, 2013 में 5, 2014 में शून्य दिन थी। 2015 में 39, 2016 में 55, 2017 में 77, 2018 में 73 और 2019 में 60 दिन सूचकांक मानक स्तर से बेहतर रहा।
सीएसई की सिफारिश
- दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा साफ करने के लिए प्रदूषण में 65 फीसदी लानी होगी कमी।
- वाहन प्रदूषण में करनी होगी कटौती। सार्वजनिक परिवहन को करना होगा मजबूत।
- औद्योगिक प्रदूषण पर लगानी होगी रोक।
- धूल के महीन कणों को रोकने के लिए निर्माण गतिविधियों को करना होगा नियमित।
- अवशेष जलाने पर सख्ती से लगानी होगी पाबंदी।