कड़कड़डूमा अदालत ने पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों से संबंधित एक मामले की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह हैरान करने वाली बात है कि पुलिस ने दंगाइयों की गोली से घायल एक व्यक्ति को उसके ही मामले में आरोपी बनाने का आग्रह किया है।
अदालत ने सभी नौ आरोपियों को आरोपमुक्त करते हुए कहा कि यह अजीब है कि एक ही मामले में एक ही व्यक्ति गवाह भी है और आरोपी भी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने इस मामले में हत्या का प्रयास के तहत आरोपी बनाए गए नौ लोगों को आरोपमुक्त कर दिया और कहा कि इस मामले में केवल दंगे से संबंधित धाराएं बनाती हैं।
अदालत ने कहा कि हालांकि जांच पूरी तरह से हैरान करने वाली है। क्योंकि अभियोजन पक्ष ने धारा 307 के तहत आठ को आरोपित किया। उन पर घायल बिट्टू की हत्या के प्रयास के आरोप लगाए गए। साथ ही घायल बिट्टू को भी आरोपी बना दिया गया। यह मामला 25 फरवरी 2020 को कबीर नगर पुलिया के पास दंगों के दौरान बिट्टू को पैर के अंगुठे में गोली लगने से संबंधित है।
अदालत ने कहा कि धारा 307 को साबित करने के उद्देश्य से अभियोजन पक्ष को यह दिखाना होगा कि घायल को गोली लगी है, जो इस मामले में न केवल गवाह है, बल्कि अब उन आरोपियों में से एक है, जिन्हें मुकदमे का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने कहा कि इस प्रकार बिट्टू को बंदूक की गोली की चोट को साबित किए बिना धारा 307 को साबित नहीं किया जा सकता लेकिन बिट्टू एक ऐसे मामले में गवाह के रूप में कैसे पेश होगा जिसमें वह खुद एक आरोपी है।