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दिल्ली दंगा मामला: चार साल बाद उमर खालिद को मिली अंतरिम जमानत, कई बार हुई याचिका खारिज; जानें क्या है वजह

Wed, 18 Dec 2024 03:58 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने दंगा मामले के आरोपी और जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने सात दिन की अंतरिम जमानत दी है। इससे पहले भी उमर खालिद जमानत की याचिका दायर कर चुका है।
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उमर खालिद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कड़कड़डूमा कोर्ट ने बुधवार को जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को यूएपीए मामले में अंतरिम जमानत दे दी, जिसमें 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित एक बड़ी साजिश का आरोप लगाया गया था।

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने परिवार में एक शादी में शामिल होने के लिए खालिद को 7 दिनों की अंतरिम जमानत दी। अंतरिम जमानत की शर्तें हैं कि खालिद मामले से जुड़े किसी भी गवाह और किसी भी व्यक्ति से संपर्क नहीं करेगा।

कोर्ट ने खालिद को अंतरिम जमानत अवधि के दौरान सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करने का भी निर्देश दिया है। साथ ही, वह केवल अपने परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और दोस्तों से ही मिलेंगे, वह अपने घर या उन जगहों पर रहेंगे जहां शादी की रस्में होंगी और खालिद को 3 जनवरी 2025 की शाम को संबंधित जेल अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।
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खालिद को अक्तूबर 2022 में उच्च न्यायालय ने जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन बाद में अपनी एसएलपी वापस ले ली। उन्होंने ट्रायल कोर्ट में दूसरी नियमित जमानत याचिका दायर की, जिसे इस साल की शुरुआत में खारिज कर दिया गया।

जानें कौन हैं जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद
लगभग तीन दशक पहले उमर खालिद का परिवार महाराष्ट्र के अमरावती के तालेगांव से दिल्ली आकर बस गया था। उमर परिवार के साथ दिल्ली के जाकिरनगर में रहते हैं। हालांकि किसी ने उन्हें यहां शायद ही कभी देखा होगा। ऐसा बताया जाता है उनके पिता सैयद कासिम रसूल इलियास दिल्ली में ही ऊर्दू की मैगजिन ‘अफकार-ए-मिल्ली’ चलाते हैं। खालिद जेएनयू के स्कूल ऑफ सोशल साइंस से इतिहास में पीएचडी कर रहे हैं। यहीं से वह इतिहास में एमए और एमफिल कर चुके हैं।



खालिद जिस डीएसयू संगठन से जुड़े हैं, उसे सीपीआई माओवादी समर्थित छात्र संगठन माना जाता है। 9 फरवरी को देश विरोधी नारे लगाने का आरोप लगने के बाद उमर खालिद अचानक गायब हो गए थे। उन्हें पकड़ने के लिए दिल्ली पुलिस ने कई जगहों पर छापेमारी की थी। जिसके बाद खबरें आई थी कि उनका संबंध आतंकी संगठन से है। ऐसी भी खबरें सामने आई थीं कि खालिद कई विश्वविद्यालयों में आतंकी अफजल गुरु का गुणगान करवाना चाहता था। जेएनयू जैसा कार्यक्रम उसने देश के 18 विश्वविद्यालयों में करने की योजना बनाई थी।
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पहले भी विवादों में आ चुका है नाम
जेएनयू के छात्रों के अनुसार खालिद ने अपने साथियों के साथ जेएनयू कैंपस में हिंदू देवी देवताओं की आपत्तिजनक तस्वीरें लगाकर नफरत फैलाने की कोशिश की थी। केवल इतना ही नहीं वह उस समारोह में भी शामिल थे जब आतंकी अफजल की फांसी पर जेएनयू कैंपस में मातम मनाया गया था। खालिद इससे पहले कई मौकों पर कश्मीर की आजादी की मांग को उठाते रहे हैं। 2010 में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में जब सीआरपीएफ जवानों की हत्या हुई थी तो उसपर जश्न मनाने वाले लोगों में वह भी शामिल थे। हालांकि इस मामले पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। 

26 जनवरी, 2015 को ‘इंटरनेशनल फूड फेस्टिवल’ के बहाने कश्मीर को अलग देश दिखाकर उसका स्टॉल लगाया गया। जब नवरात्रि के दौरान पूरा देश देवी दुर्गा की आराधना कर रहा था, उसी समय जेएनयू में दुर्गा का अपमान करने वाले पर्चे, पोस्टर जारी करके ना केवल अशांति फैलाई गई बल्कि महिषासुर को महिमामंडित कर महिषासुर शहादत दिवस का आयोजन किया गया। इन कई आयोजनों से उमर खालिद पहले भी सवालों के घेरे में आ चुके हैं।
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