शिकायतकर्ता आसिफ दुकान में किराएदार था और दुकान मालिक भगत सिंह ने कथित तौर पर आरोपी व अन्य को लूटपाट करते हुए देखा था। जांच के दौरान भगत सिंह ने बताया कि दंगाई आक्रामक थे और दुकान को लूटना चाहते थे, क्योंकि यह एक मुस्लिम की दुकान थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने उन्हें रोकने की कोशिश की थी। भगत सिंह ने सुरेश की पहचान 7 अप्रैल 2020 को आरोपी में से एक के रूप में की।
भगत सिंह ने अपने बयानों में कहा कि घटना के समय उसके हस्तक्षेप करने पर बुरे परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। उन्होंने कहा इसके बाद उसने बीट पर तैनात पुलिसकर्मी को पूरी घटना से अवगत करवाया। अदालत ने 9 मार्च 2021 को सुरेश पर धारा 143, 147, 427 (पचास रुपये से ज्यादा राशि को नुकसान पहुंचाने), 454 (अतिक्रमण), 149 (गैरकानूनी रूप से एकत्रित होने) और आईपीसी की 395 के तहत अभियोग तय किए गए थे।