उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के सिलसिले में अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार आरोपियों को छोड़ने और असली अपराधियों को सजा देने के लिए न्यायिक आयोग बनाने की मांग बुधवार को सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों के एक समूह ने की। इन्होंने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि विरोध की लोकतांत्रिक आवाजों को धीरे धीरे फंसाया जा रहा है। यह बयान जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद की 13 सितंबर को हुई गिरफ्तारी के बाद आया है। खालिद को दिल्ली पुलिस ने यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया है।
यह संयुक्त बयान योजना आयोग की पूर्व सदस्य सईदा हमीद, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार, सीपीआईएमएल की पोलित ब्यूरो सदस्य कविता कृष्णन, पत्रकार पामेला फिलिपोस तथा डूटा की पूर्व अध्यक्ष नंदिता नारायण की ओर से जारी किया गया है।
बयान में कहा गया है कि विरोध की लोकतांत्रिक आवाजों को धीरे धीरे फंसाया जा रहा है इनमें छात्र, शिक्षाविद, कलाकार, राजनेता तथा कार्यकर्ता शामिल हैं। हम पूर्वाग्रह तथा बदनियति से प्रभावित जांच को फौरान रोकने तथा इन सभी रिहा करने की मांग करते हैं।