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दिल्ली लाल किला ब्लास्ट: बम बनाने के लिए किया AI और यूट्यूब का इस्तेमाल, NIA चार्जशीट में बड़ा खुलासा

Sun, 24 May 2026 02:55 PM IST
Vijay Singh Pundir डिजिटल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एनआईए की चार्जशीट में दावा किया गया है कि आरोपी जासिर ने यूट्यूब और चैट जीपीटी का इस्तेमाल करते हुए 'रॉकेट कैसे बनाएं' और 'मिश्रण किस अनुपात में होना चाहिए' जैसे सवाल खोजे थे। जासिर ने फ्लिपकार्ट से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मंगवाए थे।
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दिल्ली ब्लास्ट केस - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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दिल्ली के लाल किला इलाके में हुए कार बम विस्फोट मामले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी की चार्जशीट के अनुसार, वैश्विक आतंकी संगठन अल-कायदा से जुड़े एक मॉड्यूल के आरोपियों ने आतंकी साजिश रचने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्लेटफॉर्म और डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग किया। एनआईए की जांच में यह बात सामने आई है कि हमले के आरोपियों ने बम बनाने के लिए यूट्यूब और चैटजीपीटी से तकनीकी सीखी और इस्तेमाल किया था। यूट्यूब और चैट जीपीटी का सहारा लेकर रॉकट कैसे बनाया जाए और उसमें इस्तेमाल होने वाले मिश्रण का अनुपात क्या होना चाहिए, जैसी जानकारियां जुटाई।

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अधिकृत सूत्रों ने रविवार को बताया कि पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली में हुए शक्तिशाली आईईडी धमाके के मामले में दायर आरोपपत्र में विस्तार से बताया गया है कि आरोपियों ने कैसे प्रयोगशाला स्तरीय तरीका अपनाकर आईईडी बनाए और उनका इस्तेमाल किया। आरोपपत्र में नामजद आरोपियों में एक जासीर बिलाल वानी का नाम अल-कायदा से जुड़े आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद के अंतरिम आतंकी मॉड्यूल के इन-हाउस इंजीनियर के तौर पर सामने आया है।

यूट्यूब-चैट जीपीटी का किया इस्तेमाल
एनआईए की चार्जशीट में दावा किया गया है कि आरोपी जासिर ने यूट्यूब और चैट जीपीटी का इस्तेमाल करते हुए 'रॉकेट कैसे बनाएं' और 'मिश्रण किस अनुपात में होना चाहिए' जैसे सवाल खोजे थे। जांच एजेंसी ने इसे डिजिटल और एआई प्लेटफॉर्म के कथित दुरुपयोग का उदाहरण बताया है। आरोपियों ने रॉकेट-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बनाए थे और जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीगुंड के जंगलों में उनका परीक्षण भी किया था।
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एनआईए जांच में पाया गया कि जासीर बिलाल वानी इस साजिश के लिए तकनीकी सहायता मुहैया कराने के मकसद से वर्ष 2024-25 के दौरान दो से तीन बार हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी परिसर में रुका था। इस यूनिवर्सिटी में कार्यरत तीन डॉक्टरों पर इस धमाके में शामिल होने का आरोप है। जांच में पता चला कि साजिशकर्ताओं में शामिल डॉ. अदील अहमद राथर ने जासीर का परिचय डॉ. उमर उन नबी से कराया था। मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी ही धमाके में इस्तेमाल विस्फोटक लदी कार चला रहा था। अदील ने जासिर को एपीके के रूप में पोटेशियम नाइट्रेड समेत आईईडी बनाने का अन्य सामान मुहैया कराया।

फ्लिपकार्ट से मंगाया सामान
दिसंबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच जासिर ने अपने फ्लिपकार्ट अकाउंट से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मंगवाए थे। इनमें सेंसर इंडक्टिव प्रॉक्सिमिटी स्विच, हीट गन, पीजो प्लेट, रिमोट कंट्रोल रिले-स्विच आएफ (रेडियो फ़्रीक्वेंसी) ट्रांसमीटर और रिसीवर किट, फ्लेमलेस रिचार्जेबल पॉकेट लाइटर, सोल्डरिंग किट और एलईडी इलेक्ट्रॉनिक किट शामिल थे। चार्जशीट के अनुसार, इन सामानों की खरीद के लिए पैसा डॉ. उमर ने दिया था और जासिर ने कैश-ऑन-डिलीवरी के जरिए सामान प्राप्त किया। बाद में जासिर ने इन पुर्जों को जोड़कर डॉ. उमर को सौंप दिया। डॉ. उमर ने इसी ट्रिगर मैकेनिज्म का इस्तेमाल करके कार में लगाई गई आईईडी में धमाका किया।

डॉ. उमर ने जासिर को दो ड्रोन दिए थे और इनकी उड़ान और पेलोड क्षमता को बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए थे। जांच में यह भी सामने आया है कि उनकी योजना इन ड्रोनों में विस्फोटक लगाकर उन्हें हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की थी, ताकि कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में मौजूद सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमले किए जा सकें।

जांच में यह भी पता चला है कि जासीर ने पर डॉ. उमर, डॉ. मुजम्मिल शकील और अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर अनंतनाग के काजीगुंड जंगल में रॉकेट आईईडी का निर्माण और परीक्षण किया। एनआईए टीमों ने विस्तृत जांच के आधार पर जंगल से इन उपकरणों के अवशेष बरामद किए।

बता दें कि एनआईए ने 14 मई को पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष अदालत में 10 आतंकियों के खिलाफ 7500 पन्नों का विस्तृत आरोपपत्र दायर कर दिया है। इस धमाके में 15 लोगों की मौत हो गई थी और 35 लोग घायल हुए थे। एक दर्जन से अधिक वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे।

एनआईए के आरोपपत्र के अनुसार, धमाका ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ (एजीयूएच) नामक आतंकी संगठन ने किया था, जो अल-कायदा इन द इंडियन सबकांटिनेंट की शाखा है। दोनों संगठनों को पहले ही केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंधित घोषित किया जा चुका है। धमाके को अंजाम देने वाला आतंकी उमर उन नबी (पुलवामा, जम्मू-कश्मीर) स्वयं कार में बैठकर मानव बम बना था। एनआईए ने डीएनए फिंगरप्रिंटिंग से उसकी पहचान की पुष्टि की है। एनआईए ने अपनी जांच में पाया कि आरोपियों ने 2022 में श्रीनगर में गुप्त बैठक कर एजीयूएच को ‘एजीयूएच अंतरिम’ नाम से पुनर्जीवित किया था। इसके तहत उन्होंने ऑपरेशन हेवनली हिंद शुरू किया, जिसका उद्देश्य भारत सरकार को उखाड़ फेंकना और शरिया कानून लागू करना था।

इनके नाम आरोप पत्र में किए शामिल
आरोपपत्र में उमर उन नबी के अलावा डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, आमिर राशिद मीर, जासीर बिलाल वानी, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, सोयब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार शामिल हैं। कई आरोपी कश्मीर के कट्टरपंथी मेडिकल प्रोफेशनल बताए गए हैं।
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वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिये साबित की गई वारदात
एनआईए का दावा है कि आरोपियों ने बड़े पैमाने पर हथियार जमा किए, नए सदस्य भर्ती किए, जिहादी प्रचार किया और घरेलू रसायनों से उच्च क्षमता वाले विस्फोटक तैयार किए। धमाके में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक ट्राईएसीटोन ट्राईपरॉक्साइड था, जिसे उन्होंने खुद तैयार किया था। 7500 पन्नों के आरोपपत्र में 588 मौखिक गवाहियों, 395 से अधिक दस्तावेजों और 200 से ज्यादा जब्त की गई वस्तुओं का जिक्र है। एनआईए ने फोरेंसिक, डीएनए, वॉयस एनालिसिस और वैज्ञानिक जांच के आधार पर पूरी साजिश को उजागर किया है।

इन धाराओं के तहत लगाए गए आरोप
आरोपपत्र यूएपीए 1967, भारतीय न्याय संहिता 2023, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908, शस्त्र अधिनियम 1959 और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की विभिन्न धाराओं के तहत दायर किया गया है। एनआईए ने अब तक इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी फरार आतंकियों की तलाश में तेजी से छानबीन कर रही है। यह मामला दिल्ली पुलिस से एनआईए को स्थानांतरित किया गया था। जांच एजेंसी का दावा है कि उसने एक बड़े जिहादी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है, जिसकी गतिविधियां जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर तक फैली हुई थीं।
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