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Delhi Pollution: दम फूलने के साथ रात की नींद भी उड़ा रहा प्रदूषण, अस्थमा-दमा मरीजों की बढ़ी मुसीबत ...और दवा

Thu, 23 Oct 2025 04:00 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

अलग-अलग अस्पतालों की ओपीडी में सांस फूलने, खांसी, सिरदर्द, आंखों में जलन, तनाव व नींद न आने सहित कई दूसरे लक्षण लेकर लोग अस्पतालों में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। साथ ही, अस्थमा, दमा व सीओपीडी मरीजों की दवा की खुराक भी प्रदूषण के कारण बढ़ गई है।
 
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दिल्ली प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी में बढ़ता प्रदूषण लोगों की रात की नींद भी उड़ा रहा है। अलग-अलग अस्पतालों की ओपीडी में सांस फूलने, खांसी, सिरदर्द, आंखों में जलन, तनाव व नींद न आने सहित कई दूसरे लक्षण लेकर लोग अस्पतालों में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। साथ ही, अस्थमा, दमा व सीओपीडी मरीजों की दवा की खुराक भी प्रदूषण के कारण बढ़ गई है।

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गुरु तेग बहादुर अस्पताल के मेडिसिन विभाग में प्रो. डॉ. कुलदीप कुमार ने बताया कि सांस संबंधी परेशानी को लेकर अस्पताल की ओपीडी में 10-20 फीसदी मरीज बढ़ गए हैं। एलर्जी ब्रोनकाइटिस की समस्या मरीजों में आमतौर पर देखने को मिल रही है। इसमें मरीज को लगातार खांसी, सांस लेने में तकलीफ, छाती में जकड़न व घरघराहट की दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदूषण के कारण अस्थमा, दमा और सीओपीडी मरीजों को दवा की खुराक बढ़ानी पड़ रही है। पहले जो मरीज दिन में दो बार दवा लेता था अब उसे चार-पांच बार दवा देने का परामर्श दिया जा रहा है। मरीज नींद न आने की परेशानी भी बता रहे हैं। हर उम्र का व्यक्ति उपचार के लिए आ रहा है। हार्ट और किडनी के मरीजों की परेशानी भी बढ़ गई है।
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इधर, दिल्ली सरकार के सबसे बड़े लोकनायक अस्पताल में अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक एवं मीडिया समन्वयक डॉ. प्रफुल्ल कुमार ने बताया कि प्रदूषण के कारण ओपीडी में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। बच्चे और बुजुर्ग सांस संबंधी परेशानी को लेकर पहुंच रहे हैं। खांसी की समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है।

अस्पताल प्रदूषण से संबंधित बीमारियों के बढ़ते मामलों के प्रति पूरी तरह सतर्क है। प्रदूषण के बढ़ने पर हृदय संबंधी मरीजों में उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा और स्ट्रोक होने की संभावना रहती है।

अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. बीएल चौधरी के निर्देशन में रेस्टिपरेटरी और इमरजेंसी टीम 24 घंटे अलर्ट मोड में है। ऑक्सीजन, नेबुलाइजर और आवश्यक दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। लोगों से अपील है कि वह प्रदूषण नियंत्रण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

प्रदूषण से बचाव के लिए यह करें

  • बच्चे और बुजुर्ग बाहरी गतिविधियों में शामिल न हों
  • सुबह और शाम के समय व्यायाम से बचें
  • बाहर जाने पर चेहरे पर मास्क लगाकर रखें
  • आंखों में जलन महसूस होने पर ठंडे पानी से धोएं
  • कोई भी दवा बिना डॉक्टर के परामर्श के न लें
  • पर्याप्त मात्रा में पानी लें और विटामिन सी व एंटीऑक्सीडेंट युक्त फल खाएं
  • दोपहिया चालक आंखों पर चश्मा और चेहरे को मास्क से ढककर रखें
  • घर की खिड़कियां बद रखें ताकि बाहरी धूल अंदर न आए
  • खुले में कचरा न जलाएं
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