फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi Police: डिमोशन की अर्जी मंजूर, सब-इंस्पेक्टर को बनाया गया सिपाही; आप भी जानिए कैसी बही 'उलटी गंगा'

Sat, 09 May 2026 02:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त ने मनीष के प्रार्थना पत्र को स्वीकारते हुए उसे सिपाही पद पर डिमोट कर दिया है। पुलिस सूत्रों ने इस संबंध में जारी हुए आदेश की भी पुष्टि कर दी है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हर कोई आगे बढ़ने के लिए तरक्की और प्रमोशन चाहता है लेकिन दिल्ली पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर ने पदावनति की इच्छा जताई थी। सिपाही बनने की इस इच्छा ने सहकर्मियों से लेकर उच्च अधिकारियों तक हैरत में डाल दिया है। गौर करने वाली बात यह है कि उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त ने मनीष के प्रार्थना पत्र को स्वीकारते हुए उसे सिपाही पद पर डिमोट कर दिया है। पुलिस सूत्रों ने इस संबंध में जारी हुए आदेश की भी पुष्टि कर दी है।

विज्ञापन


जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार मनीष ने प्रार्थना पत्र में लिखा था कि मुझे नहीं बनना सब-इंस्पेक्टर, मैं कांस्टेबल ही ठीक। दरअसल, ये सब इंस्पेक्टर, पहले कांस्टेबल के तौर पर भर्ती हुआ था। बाद में परीक्षा देकर ये इस सब-इंस्पेक्टर बना दिया गया लेकिन खुश होने के बजाय वह दुखी रहने लगा। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय की पेंशन सेल की ओर से सभी संबंधित इकाइयों को पत्र भेजा गया है।

पुलिस उपायुक्त को डिमोशन का अधिकार
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है जिले के कप्तान को एसआई को डिमोशन करने का अधिकारी होता है। उत्तर-पूर्वी जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त संदीप लांबा ने एसआई मनीष के डिमोशन की पुष्टि करते हुए बताया कि उसे सिपाही बनने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। एसआई मनीष ने सिपाही बनने का प्रार्थना पत्र दिया था।
विज्ञापन


पढ़ाई के लिए समय निकलना चाहाता था
वरिष्ठ पुलिस सूत्रों का कहना है कि मनीष पढ़ाई में होशियार है। शायद वह आगे बड़ी परीक्षाएं देना चाहता है। थानेदार पद पर रहते हुए पढ़ाई के लिए समय नहीं मिल पाता। सिपाही रहते हुए उसे पढ़ाई का समय मिला जाता था। मनीष से जब बात की गई तो उन्होंने थानेदार से सिपाही बनने के लिए पीछे कोई कारण नहीं बताया। उसने इतना ही कहा कि अपने-अपने फैसले होते हैं।

पुलिस मुख्यालय ने रिपोर्ट मांगी
इस मामले में कार्रवाई से पहले पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों और इकाइयों से रिपोर्ट मांगी है। पत्र में कहा गया है कि यह बताया जाए कि संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कोई विभागीय जांच, आपराधिक मामला, विजिलेंस जांच, निलंबन, शिकायत, ओवरपेमेंट, मेडिकल या अनुपस्थिति से जुड़ा कोई मामला लंबित तो नहीं है। साथ ही नो डिमांड सर्टिफिकेट भी तीन दिनों के भीतर उपलब्ध कराने को कहा गया था। यदि तय समय में कोई जानकारी नहीं दी जाती है तो इसे निल रिपोर्ट माना जाएगा और आगे की कार्रवाई की जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें