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एफआईआर में गैर प्रचलित उर्दू और फारसी शब्दों का प्रयोग ना करे दिल्ली पुलिसः हाईकोर्ट

Thu, 12 Dec 2019 12:56 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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हाईकोर्ट ने एफआईआर में उर्दू और फारसी शब्दों के प्रयोग पर रोक लगाने को लेकर पहले आदेश के संबंध में स्पष्ट किया कि एफआईआर में सरल भाषा प्रयोग होनी चाहिए और गैर प्रचलित उर्दू और फारसी शब्दों से बचना चाहिए। इसके साथ ही पीठ ने कहा कि बोलचाल में प्रयोग होने वाले उर्दू और फारसी शब्दों का प्रयोग एफआईआर में किया जा सकता है।

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मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की खंडपीठ ने कहा कि शिकायत दर्ज करते समय पुलिस आम बोलचाल में इस्तेमाल होने वाले उर्दू और फारसी के शब्दों का उपयोग कर सकती है लेकिन ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए जो शिकायतकर्ता की समझ में ना आते हों। यह आदेश देते हुए खंडपीठ ने याचिका का निपटारा कर दिया।

इससे पहले खंडपीठ ने एफआईआर में उर्दू और फारसी शब्दों के प्रयोग की सत्यता की जांच के लिए दिल्ली के अलग-अलग 10 थानों से 10-10 एफआईआर यानी कुल 100 एफआईआर की प्रतियां मांगाई थीं। खंडपीठ ने पुलिस को निर्देश दिया था कि एफआईआर दर्ज करते समय उर्दू या फारसी के 383 शब्दों का इस्तेमाल बंद किया जाए। इस बाबत पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि दिल्ली पुलिस के सभी थानों को उर्दू-फारसी शब्दों के बजाय अन्य शब्द प्रयोग करने के लिए सर्कुलर जारी किया जा चुका है।
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यह याचिका नईमा पाशा की ओर से दायर की गई थी। याचिका में दावा किया गया था कि दिल्ली पुलिस का सर्कुलर (परिपत्र) कथित रूप से अदालत के सात अगस्त के उस निर्देश के बाद जारी किया गया। इसमें शिकायत दर्ज करते समय सरल शब्दों के इस्तेमाल का निर्देश दिया था लेकिन थानों में इस आदेश का पालन नहीं किया जा रहा।

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