प्रेस रिलीज की में क्या लिखा?
पुलिस ने इस बाबत 9 अक्तूबर को सीजेपी के को-कन्वीनर सौरव दास और ज्वाइंट सेक्रेटरी बाला कृष्णा को सूचित किया था कि उक्त पत्र केवल प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के बारे में एक सूचना है। इसे नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मांगने वाला विधिवत जमा किया गया आवेदन नहीं माना जा सकता है। इसके अलावा, यह सूचना बहुत कम समय पहले प्राप्त हुई है, जबकि मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार जंतर-मंतर पर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए आवेदन, संबंधित कार्यक्रम की प्रस्तावित तारीख से कम से कम 10 दिन पहले जमा किया जाना चाहिए।
पत्र में कहा गया है कि अधिकारी इस बात को स्वीकार करते हैं कि विरोध प्रदर्शन करना एक मौलिक अधिकार है। हालांकि, अनुमति देने या अन्यथा निषेध लगाने का निर्णय लेते समय इस मौलिक अधिकार के साथ-साथ उन अन्य नागरिकों और क्षेत्र के निवासियों के मौलिक अधिकारों पर भी विचार किया जाना आवश्यक है, जहां प्रदर्शन आयोजित किया जाना प्रस्तावित है।
पूर्व के अनुभवों और लगातार सामने आ रहे अनुभवों से पता चलता है कि आम नागरिकों को विरोध प्रदर्शनों के कारण उत्पन्न होने वाली अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इनमें विरोध प्रदर्शन, यातायात जाम, आम लोगों में असुरक्षा की आशंका तथा व्यक्तियों और संपत्तियों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं शामिल हैं।
पत्र में नई दिल्ली जिले के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस के हवाले से कहा गया है कि आपको पहले भी एक अलग अवसर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की अनुमति दी गई थी। हालांकि, अनुमति मिलने के बाद आपका आचरण कई स्तरों पर उल्लंघनकारी पाया गया। इसमें निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी प्रदर्शन जारी रखना शामिल था, जिसे सख्ती से प्रतिबंधित किया गया था। इस कारण कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्याएं उत्पन्न हुईं और सार्वजनिक व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई। उक्त दिशानिर्देश दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 23.07.2018 को डब्ल्यू.पी. (सी) संख्या 1153/2017 तथा संबंधित सिविल अपील संख्या 862, 863 और 864/2018 में पारित आदेश के अनुपालन में तैयार किए गए हैं। इनका सभी संबंधित पक्षों द्वारा सख्ती से पालन किया जाना आवश्यक है।
हिंसा और आपराधिक तत्व
इस दौरान 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए और विरोध प्रदर्शनों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,000 से अधिक लोग शामिल हुए, जिससे हिंसा भड़की और निर्दोष छात्र भी घायल हुए।
महिला पुलिसकर्मियों से अभद्रता गंभीर मुद्दा
पिछले हफ्ते जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ छेड़छाड़ और मारपीट की रिपोर्ट्स पर पुलिस ने गहरी चिंता जताई है और इसे बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है।
दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने से रोकने और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इलाके में चाक-चौबंद व्यवस्था कर दी है।