दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने एनसीईआरटी की विजिलेंस टीम के साथ मिलकर एनसीईआरटी की नकली किताबें छापने वाले गैंग का पर्दाफाश किया है। टीम ने एक आरोपी को धर-दबोचा है। जिसकी पहचान अभिषेक चौधरी उर्फ गोल्डी (28) के रूप में हुई है। पुलिस ने इसकी निशानदेही पर पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर इलाके से 50 लाख से अधिक की नकली किताबें बरामद की हैं। आरोपी नकली किताबों पर मोटा मुनाफा कमाता था। इसके पास से किताबों पर लगने वाला वाटर मार्क भी बरामद किया है। आरोपी दक्षिण और उत्तर भारत के राज्यों में किताबों की सप्लाई करता था। पुलिस पकड़े गए आरोपी से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।
अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजीव रंजन ने बताया कि अपराध शाखा की टीम को सूचना मिली कि पूर्वी दिल्ली में कुछ लोग एनसीईआरटी की नकली किताबें छाप रहे हैं। जांच के लिए एसीपी जसबीर सिंह व अन्य की टीम बनाई गई। जानकारी जुटाने के बाद एनसीईआरटी के अधिकारियों को भी सूचना दी गई। 12 मार्च को एनसीईआरटी की विजिलेंस व प्रोडक्शन टीम ने गाजीपुर गांव में छापामारी की। डी-3, गाजीपुर गांव से पुलिस ने आरोपी अभिषेक को गिरफ्तार कर उसके यहां से छठीं से 12वीं कक्षा तक की हजारों किताबें बरामद की।
आरोपी ने आधुनिक ऑफसेट मशीन लगाई हुई थी। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने बीकॉम के दौरान पढ़ाई छोड़कर अपने पिता के साथ प्रिंटिंग प्रेस में काम शुरू किया। 2017 में वह करावल नगर निवासी राहुल जैन नामक शख्स के संपर्क में आया। राहुल ने अभिषेक को एनसीईआरटी की किताबों का कवर पेज छापने के लिए दिया तो उसे एनसीईआरटी की नकली किताबें छापने का पता चला। अभिषेक को राहुल ने बताया कि एनसीईआरटी की किताबें हमेशा शॉर्ट रहती हैं। ऐसे में नकली किताबें छापकर मोटा मुनाफा कमाया जा सकता है। इसके बाद से से आरोपी ने किताबें छापकर उनकी सप्लाई शुरू कर दी।