पर्यटकों पर आतंकी हमला, 26 की नृशंस हत्या
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा कर 26 लोगों की नृशंस हत्या कर दी। सेना की वर्दी में आए दहशतगर्दों ने पहलगाम की बायसरन घाटी में पर्यटकों से पहले उनका धर्म पूछा, परिचय पत्र देखे और फिर हिंदू हो कहकर गोली मार दी। 26 मृतकों में ज्यादातर पर्यटक हैं, जबकि दो विदेशी और दो स्थानीय नागरिक शामिल हैं।
टीआरएफ ने ली हमले की जिम्मेदारी
हमले में करीब 14 लोग घायल हुए हैं। वहीं, सुरक्षा एजेंसियों ने देर रात कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया है। तीन जुलाई से शुरू होने जा रही श्रीअमरनाथ यात्रा से पहले इस कायराना हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े गुट द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है। फरवरी, 2019 में पुलवामा में हुए हमले के बाद से जम्मू-कश्मीर में यह सबसे बड़ा आतंकी हमला है। उस हमले में सीआरपीएफ के 47 जवान मारे गए थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे बायसरन घाटी के घास के मैदान में आतंकी घुस आए। इन आतंकियों ने खाने-पीने की दुकानों के आसपास घूम रहे, टट्टू की सवारी कर रहे पर्यटकों पर ताबड़तोड़ गोलीबारी शुरू कर दी।
हमले में कितने आतंकी शामिल थे?
बायसरन में हुए आतंकी हमले में अब तक छह आतंकियों के शामिल होने की बात सामने आई है। हमलावरों में दो पाकिस्तानी और दो स्थानीय आतंकी शामिल थे। दो अन्य के बारे में जानकारी अभी सामने नहीं आ सकी है। हमले में शामिल तीन संदिग्ध आतंकियों के स्केच जारी किए हैं। इनके नाम आसिफ फौजी, सुलेमान शाह और अबु तल्हा बताए गए हैं।
इस आतंकी हमले में मारे गए 26 मृतकों में ज्यादातर पर्यटक थे। इनमें उत्तर प्रदेश के कानपुर के कारोबारी शुभम द्विवेदी, पश्चिम बंगाल के कोलकाता के बिटन अधिकारी, कोलकाता के ही समीर गुहा और पुरुलिया जिले के मनीष रंजन। मनीष मूलत: बिहार के रहने वाले थे। हरियाणा के रहने वाले लेफ्टिनेंट विनय नरवाल, कर्नाटक के बंगलूरू के भरत भूषण, शिवमोगा के कारोबारी मंजुनाथ राव, महाराष्ट्र के दलीप जयराम देसाई, अतुल श्रीकांत मोने, गुजरात के हिम्मत भाई, प्रशांत कुमार बलेश्वर, मनीश राजदान, रामचंद्रम और सूरत के शलिंद्र कालापिया, भागवनगर के समित और यतीश परमार, बोटन अधकेरी और संजय लखन, अनंतनाग के सैयद हुसैन शाह शामिल हैं।