जिस बिल्डिंग में हादसा हुआ वहां पर पहले दाल का कारोबार होता था। 10-12 साल पूर्व रिहान के पिता मोहम्मद रहीम ने 600 गज के प्लॉट को खरीदकर वहां पर अपनी फैक्टरी लगाई थी। कई साल पहले उनकी मौत हो गई। मरने से पहले रहीम ने प्लॉट को तीन हिस्सों में अपने बेटों शान-ए-इलाही, रिहान और इमरान के बीच बांट दिया।
तीनों भाई रानी झांसी रोड पर ही चिमली वाली गली में रहते हैं। इन लोगों ने कुछ हिस्से को अपने पास रखकर वहां बैग बनाने, पेकिंग करने वाले लोगों को बिल्डिंग का बड़ा हिस्सा किराए पर दे दिया। बड़े-बड़े हॉल में कारखाने वाले ज्यादा से ज्यादा मजदूरों को रखकर काम करवाते थे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरी 600 गज की इस इमारत के तीन हिस्सों में 300 से 350 लोग मौजूद थे। आग लगने वाली इमारत में ही 100 से अधिक लोग थे। हादसे में 43 की मौत हो गई, जबकि 21 लोग जख्मी हो गए।