दिल्ली के पुलिस थानों में चोरी और लावारिस वाहन थानों में खड़े हैं। ऐसे में वाहनों को वापस करने की प्रक्रिया कछुए की चाल से चल रही है। इसके चलते पुलिस स्टेशन व पिट में हजारों वाहन कबाड़ हो गए हैं या होने जा रहे हैं।
हमारे पास जमा वाहनों को रखने के लिए जगह नहीं हैं। पुलिस स्टेशनों के अंदर व बाहर और विशेष रूप से जगह किराए पर लेकर बनाई गई पिट में भी जगह नहीं बची है। ऐसे में थानों में जमा अपने वाहनों को ले जाओ। ये कहना है कि दिल्ली पुलिस का। वाहनों के निस्तारण के लिए दिल्ली पुलिस लोगों के घर-घर जाकर अनुरोध कर रही है। इससे लोग अचंभित हैं।
विज्ञापन
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वाहनों को वापस करने की प्रक्रिया कछुए की चाल से चल रही है। इसके चलते पुलिस स्टेशन व पिट में हजारों वाहन कबाड़ हो गए हैं या होने जा रहे हैं। अब दिल्ली पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा ने इस अभियान में तेजी लाने के सख्त आदेश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि केस में जमा वाहनों को तुरंत निपटारा किया जाए। पुलिस ने इंश्योरेंस कंपनियों को भी चिट्ठी लिखी है कि वह पुराने वाहनों को ले जाए। दक्षिण जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त अचिन गर्ग ने बताया कि पुलिस के पास जमा वाहनों के में ऐसे वाहन भी हैं, जिनकी मियाद पूरी हो चुकी हैं।
विज्ञापन
इनमें 10 वर्ष पूरी कर चुके डीजल वाहन व 15 वर्ष पूरे कर चुके पेट्रोल वाहन शामिल हैं। पुलिस आयुक्त ने सभी जिला पुलिस उपायुक्त से पुराने वाहनों को डिस्पोजल कर इस वर्ष की रिपोर्ट जल्द ही मांगी है।
इंश्योरेंस कंपनियों की बेरुखी पड़ रही भारी
फाइनेंस कराए लिए वाहन वारदात में शामिल पाए जाते हैं। जब वाहन मालिक वाहन को छुड़वाने के लिए क्लेम नहीं करता तो इंश्योरेंस कंपनियां ऐसे वाहनों को छुड़ाती हैं। मगर ज्यादातर पुलिस स्टेशनों देखने आया है कि इंश्योरेंस कंपनियां वाहनों को ले नहीं जाती हैं। ये वाहन थानों में खड़े रहते हैं। दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त अंकित चौहान ने बताया कि दक्षिण जिले में ऐसे 71 वाहन हैं, जिन्हें इंश्योरेंस कंपनियां उठा नहीं रही हैं।
90 चोरी के वाहनों का ऑक्शन
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार चोरी के काफी ज्यादा वाहन थानों में खड़े हैं। केस में उनकी उपयोगिता खत्म होने के बावजूद मालिक उन्हें रिलीज नहीं करवाते। ऐसे वाहनों के डिस्पोजल करने के लिए पुलिस ऑक्शन के लिए कोर्ट की अनुमति लेती है।
पुलिस उपायुक्त अंकित चौहान ने बताया कि ऐसे 90 वाहनों का ऑक्शन किया गया है। वसंत विहार में हुए निर्भया कांड की बस अभी तक सागरपुर थाने के सामने पिट में खड़ी थी। मगर जिला नाजिर या किसी अधिकारी का ध्यान उसको डिस्पोजल कराने की तरफ नहीं गया। निर्भया कांड खत्म हो चुका और दोषियों को सजा भी मिल चुकी है।
69 वाहनों को एमएसटीसी के माध्यम से किया नीलाम
दक्षिण-पश्चिमी जिले के पुलिस उपायुक्त सुरेंद्र चौधरी ने बताया कि वर्ष 2024 में डीपी एक्स की धारा 66 के तहत जब्त किए गए 69 वाहनों और 11 वस्तुओं को एमएसटीसी के माध्यम से सफलतापूर्वक नीलाम किया गया है। उन्होंने वर्ष 2024 में इनके निपटान के लिए अदालती आदेश के लिए कुल 2,120 आवेदन प्रस्तुत किए गए। इनमें से 1,620 के लिए अदालती आदेश दिए गए। स्वीकृत 1,620 प्रॉपर्टी में से 943 का निपटान किया जा चुका है, जबकि 677 अभी भी निपटान के लिए लंबित हैं।
क्लेम नहीं होने पर निकाला जाता है विज्ञापन
दिल्ली पुलिस 66 डीपी एक्ट में लावारिस वाहनों को जब्त करती है। जब इन वाहनों का मालिक सामने नहीं आता या कोई क्लेम नहीं करता तो पुलिस इनका डिस्पोजल करने के लिए कोर्ट से अनुमति लेकर विज्ञापन निकालती है। इसके बाद छह महीने तक इंतजार किया जाता है। तब भी कोई मालिक नहीं आता है तो पुलिस उनका ऑक्सन करवाती है। दक्षिण जिले ने अप्रैल से लेकर अब तक 110 वाहनों का ऑक्शन करवाया है।
आबकारी विभाग को भी लिखी चिट्ठी
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त ने बताया कि एक्साइज एक्ट में वाहनों को बंद किया जाता है। ये सालों से तक पुलिस के पास जमा रहते हैं। इनमें काफी वाहन ऐसे हैं जो अपनी 10 व 15 वर्ष की मियांद पूरी कर चुके हैं। दक्षिण जिला पुलिस ने ऐसे 313 वाहनों की पहचान की है। उन्होंने बताया कि इस तरह के वाहनों के डिस्पोजल के लिए दिल्ली सरकार के आबकारी विभाग को चिट्ठी लिखी है। पुलिस ने चिट्ठी लिखकर विभाग को कहा है कि ऐसे वाहनों का जल्द डिस्पोजल करवाया जाए।