दिल्ली वालों का दिल तो बड़ा है लेकिन दिल की सेहत का ध्यान रखने में ये फिसड्डी हैं। दिल्ली वाले दाल मखनी, भरवां पराठा और मटन बिरयानी जैसे व्यंजनों के जरिये रोज सबसे अधिक अतिरिक्त वसा का सेवन करते हैं। हर व्यक्ति एक दिन में औसतन 44.4 ग्राम वसा खा रहा है। दिल्ली के बाद अहमदाबाद में एक व्यक्ति दिनभर में 43.9 ग्राम तक अतिरिक्त वसा खा लेता है।
मुंबई और हैदराबाद में सबसे कम प्रतिदिन एक व्यक्ति क्रमश: 28.8 ग्राम और 25.1 ग्राम वसा का सेवन करता है। आईसीएमआर ने अहमदाबाद, बंगलूरू, चेन्नई, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और कोलकाता में वसा सेवन पर सर्वे किया है।
इसमें 1293 घरों के 5123 लोगाें को शामिल किया गया। सर्वे 2015-16 में हुए राष्ट्रीय पोषण निगरानी ब्यूरो के अध्ययन और हैदराबाद स्थित आईसीएमआर-एनआईएन के आंकड़ों पर आधारित है और अंतरराष्ट्रीय जीवन विज्ञान संस्थान-भारत (आईएलएसआई-भारत) ने इसकी पुष्टि की है।
महिलाओं से आगे पुरुष
सर्वे के मुताबिक महिलाओं के मुकाबले पुरुष अधिक वसा का सेवन करते हैं। सातों महानगरों में पुरुष जहां प्रतिदिन 34.1 ग्राम वसा का सेवन करते हैं, वहीं, महिलाएं 31.1 ग्राम वसा युक्त भोजन खाती हैं।
इन व्यंजनों में सर्वाधिक अतिरिक्त वसा
दाल फ्राई, चावल, भरवां पराठा, चुड़वा, कर्नाटक में चावलों की डिश बिसी बेले भात और पुलियोधरई यानी इमली के चावल में सर्वाधिक अतिरिक्त वसा होता है। मटन बिरयानी में चिकन बिरयानी, दाल और अन्य मांसाहारी पकवानों से अधिक वसा होता है। मांसाहारी खाने में भी अतिरिक्त वसा की मात्रा ज्यादा होती है। ज्यादा तला भोजन खाने वालों के शरीर में उबला या कम तला खाना खाने वालों की तुलना में अधिक अतिरिक्त वसा होता है।
36-59 की आयु वाले सबसे अधिक खा रहे
महानगरों में 36-59 आयु के लोग सबसे अधिक प्रतिदिन 36.1 ग्राम वसा का सेवन कर रहे हैं। इनके बाद 18-35 आयु वर्ग के लोग 34.8 ग्राम और किशोर प्रतिदिन 32.8 ग्राम वसा का सेवन करते हैं। पांच वर्ष तक के बच्चे सबसे कम 15.7 ग्राम वसा का प्रतिदिन सेवन करते हैं।
दिल की बीमारियों का कारण
अतिरिक्त वसा का सेवन दिल की बीमारियों का मुख्य कारण होता है। इससे शरीर में कोलेस्ट्रॉल अधिक जमा होने लगता है और दिल को कमजोर करता है। इसके अलावा उक्त रक्तचाप की बीमारी भी लग जाती है।