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स्कूल बैग के बोझ को करने में कम अभिभावक भी संग

Sat, 28 Nov 2020 05:05 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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school bag
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केंद्र की नई शिक्षा नीति के मुताबिक महीने में 10 दिन स्कूल बैग ले जाने और बोझ को कम करने के कदम को राजधानी के अभिभावक सराहते हुए साथ देने के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही अभिभावकों ने शिक्षा के क्षेत्र में अन्य पहलुओं पर भी चर्चा कर कदम उठाने की बात कही है।
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दरअसल, केंद्र की नई शिक्षा नीति के मुताबिक अब कक्षा पहली से बारहवीं तक के सभी छात्रों को महीने में 10 दिन बिना बैंक के स्कूल जाना होगा। वहीं, छठी से 12वीं कक्षा तक के छात्रों को छुट्टियों के दौरान व्यावसायिक कौशल भी प्राप्त करना होगा। इसको लेकर अभिभावकों का कहना है कि इससे जहां छोटे बच्चों पर बैग का बोझ कम होगा वहीं, बच्चे भी कम कॉपी किताबों के साथ स्कूल पहुंचने में प्रोत्साहित होंगे। 

बुराड़ी स्थित गृहणी कुसुम ने बताया कि उनका बच्चा निजी स्कूल की तीसरी कक्षा में पढ़ता है, लेकिन कक्षा के हिसाब से बच्चे का स्कूल बैग बहुत ज्यादा भारी है। यही वजह है कि स्कूल भेजते हुए बच्चों के स्वास्थ्य के भी फिक्र होती है। क्योंकि, अधिक बोझ के कारण बच्चों को भी परेशानी होती है। हालांकि, सरकार की नई शिक्षा नीति के मुताबिक अब कुछ राहत मिलेगी।
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रोजगार परक शिक्षा पर जोर
अभिभावकों ने बच्चों को स्कूलों में रोजगारपरक शिक्षा पर जोर दिया है।अभिभावकों ने कहा कि जिस प्रकार नई शिक्षा नीति के मुताबिक कक्षा छठी से लेकर कक्षा बारहवीं तक के छात्रों को छुट्टियों के दौरान व्यावसायिक कौशल प्रदान किया जाएगा। इसकी जरूरत काफी लंबे समय से बनी हुई थी। क्योंकि, कई बार बच्चे 12 वीं कक्षा पढ़ने के बाद कौशल न होने की वजह से रोजगार की दिशा में कदम नहीं बढ़ा पाते हैं। इस वजह से कई बार छात्रों के शुरुआती 1 से 2 साल खराब हो जाते हैं। इसका खामियाजा आगे चलकर भुगतना होता है, लेकिन यदि जब स्कूल से ही बच्चों में कौशल की जानकारी होगी तो बच्चे आगे जाकर बेहतर दिशा में बढ़ सकेंगे।

जिम्मेदारी निभाने को तैयार अभिभावक
शिक्षा की नई नीति के मुताबिक अभिभावकों की भी जिम्मेदारी तय की गई है। इसके तहत अब पहली कक्षा से लेकर दसवीं कक्षा तक के छात्रों स्कूल बैग उनके वजन से 10 फ़ीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए। वहीं, प्री प्राइमरी बच्चों के लिए स्कूल बैग की अनिवार्यता खत्म हो गई है। इसको लेकर अभिभावकों का कहना है कि कक्षा पहली से लेकर 10वीं तक के छात्रों के लिए किए गए बदलाव सराहनीय है। वहीं, छोटे बच्चों के लिए स्कूल में बैग की अनिवार्यता को खत्म करना सबसे अच्छा कदम है। क्योंकि, छोटे बच्चे स्कूल बैग को संभालने में सबसे ज्यादा असमर्थ होते हैं।  अभिभावक भी अब इस पहल में विशेष ध्यान देकर सरकार का साथ देने के लिए भी तैयार हैं।

फीस के ढांचे को भी सुधारने की मांग
अभिभावकों ने जहां सरकार के इस कदम की सराहना की है वहीं, दूसरी ओर निजी स्कूलों में फीस की संरचना पर भी नियंत्रण की मांग की है। अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूलों में अधिकतर अधिक फीस के मामले सामने आते हैं। इस वजह से कई बार अभिभावकों को परेशानी होती है। ऐसे में इसको लेकर भी जल्द ही कोई नीति बननी चाहिए, जिससे हर तबके का इंसान निजी स्कूलों में अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला सके।

-सरकार द्वारा बनाई गई नीति सराहनीय है। वहीं,स्कूली स्तर पर व्यावसायिक कौशल की काफी लंबे समय से जरूरत थी, क्योंकि छात्र 12वीं के बाद कई बार असमंजस में होते हैं। ऐसे में यदि पहले से ही उन्हें व्यावसायिक कौशल मिलेगा तो बेहतर दिशा की ओर बढ़ सकेंगे।
-निखिल, अभिभावक

-मेरे बच्चे छोटे हैं और निजी स्कूल में पढ़ते हैं। कई बार पढ़ाई के दबाव के कारण बच्चों के बैग में अधिक किताबें हो जाती हैं। इस वजह से कई बार पीठ दर्द की भी शिकायत रहती है। हालांकि, अब इस नीति से राहत मिलेगी।
-नेहा


-इस नीति से सबसे ज्यादा फायदा छोटे बच्चों को है जो कम उम्र में बैग के बोझ से परेशान थे। अब वह भी खुशी खुशी खाली हाथ स्कूल जाने में अच्छा महसूस करेंगे।
-पुनीश, अभिभावक

-निजी स्कूलों में अभिभावकों को कई बार फीस की समस्या से जूझना पड़ता है।  स्कूल मनमर्जी से फीस में बढ़ोतरी करते हैं। ऐसे में इसको लेकर भी एक नीति बननी चाहिए।
-प्रतिज्ञा, अभिभावक


-नई शिक्षा नीति से निश्चित ही बच्चों और उनके अभिभावकों पर प्रभाव पड़ेगा। सरकार की ओर से यह अच्छा कदम उठाया गया है।
-अनामिका आर्या, अभिभावक


-मेरे बच्चे भी स्कूल में पढ़ते हैं और अक्सर स्कूल बैग के भारी होने की शिकायत करते हैं। हालांकि, अब स्कूल बैग का वजन घटने से बच्चे और मुझे दोनों को ही राहत होगी।
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-मुकुद, अभिभावक
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