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दिल्ली: आली गांव में 1800 मकान-दुकान खाली कराने का विरोध तेज-धरना, आज से पुलिस बल की मौजूदगी में होगी कार्रवाई

Sun, 27 Sep 2026 03:41 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

लोगों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपने घर नहीं छोड़ेंगे और कार्रवाई के खिलाफ एकजुट होकर विरोध करेंगे। वहीं, विभाग न्यायालय के आदेश के तहत जमीन से कब्जा हटाने की तैयारी कर रहा है।
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विस्तार
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दक्षिणी दिल्ली के आली गांव में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की जमीन पर बने करीब 1800 मकान-दुकानों को खाली कराने की कार्रवाई के विरोध में स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन तेज कर दिया है। लोगों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपने घर नहीं छोड़ेंगे और कार्रवाई के खिलाफ एकजुट होकर विरोध करेंगे। वहीं, विभाग न्यायालय के आदेश के तहत जमीन से कब्जा हटाने की तैयारी कर रहा है।

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आली चौक से शिव मंदिर तक पुश्ता रोड के दोनों ओर करीब 1500 मकान-दुकानों और पीर मोहल्ले में करीब 300 मकानों पर खाली करने के नोटिस चस्पा किए गए हैं। नोटिस में निर्धारित समयसीमा के भीतर मकान-दुकान खाली करने का निर्देश दिया गया है। समयसीमा समाप्त होने के बाद पुलिस बल की मदद से कब्जा हटाने की कार्रवाई की तैयारी है। रविवार से कार्रवाई शुरू हो सकती है।

कार्रवाई के खिलाफ धरने पर बैठे लोग
नोटिस चस्पा होने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे घर खाली करने का आदेश स्वीकार नहीं करेंगे और एक भी मकान नहीं टूटने देंगे। लोगों ने कानूनी लड़ाई के साथ सड़क पर भी विरोध जारी रखने की बात कही है। उनका दावा है कि वे आजादी के बाद से यहां रह रहे हैं और उनके पास पहचान पत्र, बिजली-पानी के बिल समेत अन्य दस्तावेज मौजूद हैं। लोगों ने पुनर्वास को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
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24 साल से चल रहा जमीन का विवाद
आली गांव में करीब 8.48 एकड़ जमीन पर कब्जे को लेकर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग और स्थानीय लोगों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। उपलब्ध अदालती रिकॉर्ड और रिपोर्टों के मुताबिक, वर्ष 2002 में जमीन से संबंधित फैसला सिंचाई विभाग के पक्ष में आया था। वर्ष 2004 में जमीन के कुछ हिस्सों से कब्जा भी हटाया गया, लेकिन आबादी वाले हिस्से में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। पिछले वर्ष साकेत कोर्ट से भी विभाग के पक्ष में फैसला आने के बाद अब जमीन खाली कराने की कार्रवाई तेज हो गई है।

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जमा पूंजी से बनाया सपने का आशियाना, अब उजड़ने का डर

आली गांव में 1800 से अधिक मकान-दुकानों पर खाली करने के नोटिस चस्पा होने के बाद करीब 15 हजार लोगों के सामने फिर से आशियाना बसाने का संकट खड़ा हो गया है। दिवाली से ठीक पहले कार्रवाई की आशंका ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। 

किसी को जीवनभर की जमा पूंजी से बनाए घर के उजड़ने का डर सता रहा है तो कोई बच्चों के भविष्य को लेकर परेशान है। वहीं, दुकानदारों के सामने घर के साथ रोजी-रोटी छिनने का संकट भी खड़ा हो गया है। लोगों ने सरकार से पुनर्वास की व्यवस्था करने और भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

स्थानीय निवासी राजकुमार ने बताया कि उनके परिवार की तीसरी पीढ़ी आलीगांव में रह रही है। उनके दादा ने यह मकान बनवाया था। उन्होंने कहा कि जीवनभर की पूंजी जोड़कर घर बनाया था। अब अचानक इसे खाली करके कहां जाएंगे, यह समझ नहीं आ रहा है। 

तीन पीढ़ियां यहीं रहीं, अब बच्चों को लेकर कहां जाएं
स्थानीय निवासी ठाकुर विकास प्रधान बताते हैं कि उनके दादा, पिता और वह खुद इसी इलाके में रहते आए हैं। उनके मुताबिक, उनके दादा ने आजादी की लड़ाई में भी हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा कि करीब पांच साल पहले उन्हें पता चला कि जिस घर में वे रह रहे हैं, उसे अवैध बताया जा रहा है।

दिवाली के लिए कर्ज लेकर भरा माल, अब दुकान पर संकट
दुकानदार मेहंत पांडेय ने बताया कि आलीगांव में सजावट का सामान खरीदने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। दिवाली को देखते हुए उन्होंने कर्ज लेकर दुकान में माल भरा था। अब दुकान खाली करने के नोटिस के बाद समझ नहीं आ रहा कि इस माल और कर्ज का क्या होगा। उन्होंने बताया कि उनके कारोबार से करीब 150 कारीगरों का रोजगार भी जुड़ा है। दुकान हटने की स्थिति में इन कारीगरों के रोजगार और भुगतान पर संकट खड़ा हो जाएगा। 
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