आली गांव में 1800 से अधिक मकान-दुकानों पर खाली करने के नोटिस चस्पा होने के बाद करीब 15 हजार लोगों के सामने फिर से आशियाना बसाने का संकट खड़ा हो गया है। दिवाली से ठीक पहले कार्रवाई की आशंका ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
किसी को जीवनभर की जमा पूंजी से बनाए घर के उजड़ने का डर सता रहा है तो कोई बच्चों के भविष्य को लेकर परेशान है। वहीं, दुकानदारों के सामने घर के साथ रोजी-रोटी छिनने का संकट भी खड़ा हो गया है। लोगों ने सरकार से पुनर्वास की व्यवस्था करने और भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
स्थानीय निवासी राजकुमार ने बताया कि उनके परिवार की तीसरी पीढ़ी आलीगांव में रह रही है। उनके दादा ने यह मकान बनवाया था। उन्होंने कहा कि जीवनभर की पूंजी जोड़कर घर बनाया था। अब अचानक इसे खाली करके कहां जाएंगे, यह समझ नहीं आ रहा है।
तीन पीढ़ियां यहीं रहीं, अब बच्चों को लेकर कहां जाएं
स्थानीय निवासी ठाकुर विकास प्रधान बताते हैं कि उनके दादा, पिता और वह खुद इसी इलाके में रहते आए हैं। उनके मुताबिक, उनके दादा ने आजादी की लड़ाई में भी हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा कि करीब पांच साल पहले उन्हें पता चला कि जिस घर में वे रह रहे हैं, उसे अवैध बताया जा रहा है।
दिवाली के लिए कर्ज लेकर भरा माल, अब दुकान पर संकट
दुकानदार मेहंत पांडेय ने बताया कि आलीगांव में सजावट का सामान खरीदने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। दिवाली को देखते हुए उन्होंने कर्ज लेकर दुकान में माल भरा था। अब दुकान खाली करने के नोटिस के बाद समझ नहीं आ रहा कि इस माल और कर्ज का क्या होगा। उन्होंने बताया कि उनके कारोबार से करीब 150 कारीगरों का रोजगार भी जुड़ा है। दुकान हटने की स्थिति में इन कारीगरों के रोजगार और भुगतान पर संकट खड़ा हो जाएगा।