दिल्ली के सरकारी अस्पतालों को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन मंगलवार रात हुई एक घटना ने इसकी पोल खोलकर रख दी। न्यू उस्मानपुर में पुलिस हिरासत से भागने के चक्कर में गिरकर घायल हुए आरोपी को भर्ती कराने के लिए पुलिस पूरी रात चार बड़े अस्पतालाें के चक्कर काटती रही, लेकिन कहीं सीटी स्कैन मशीन खराब होने तो कहीं वेंटिलेटर बेड नहीं होने का हवाला देकर घायल को एक से दूसरे अस्पताल भेज दिया गया।
थक-हारकर पुलिस आरोपी को वापस लेकर जग प्रवेश चंद्र अस्पताल पहुंची। जहां बेहतर इलाज के अभाव में आरोपी प्रमोद उर्फ पप्पू (47) ने दम तोड़ दिया। जिला पुलिस उपायुक्त डॉ. जॉय टिर्की ने बताया कि मामले मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए गए हैं। पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल बोर्ड के गठन की मांग की गई है। जांच के बाद तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि प्रमोद परिवार के साथ गली नंबर-11, शांति मोहल्ला, पहला पुश्ता न्यू उस्मानपुर में रहता था। मंगलवार रात करीब नौ बजे सूचना मिली कि शांति मोहल्ले से शराब के नशे में एक युवक महिला से झगड़ा कर रहा है। मौके पर पुलिस पहुंची तो वहां मिली 21 वर्षीय विवाहिता ने आरोप लगाया कि नशे की हालत में प्रमोद ने उससे छेड़छाड़ के अलावा पिटाई की।
इस पर मोबाइल पेट्रोलिंग वैन पर तैनात एसआई मिंटू और सिपाही इमरान प्रमोद को जिप्सी में बैठाकर थाने ले जाने लगे। रास्ते में नशे में धुत प्रमोद उल्टी करने लगा। उल्टी करने के लिए आरोपी ने जिप्सी की खिड़की का शीशा खोला और वह चलती गाड़ी से कूद गया। इस वजह से वह बुरी तरह जख्मी हो गया। पुलिस ने महिला के बयान पर मारपीट, छेड़छाड़, जान से मारने की धमकी देने समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया।
अस्पतालों के चक्कर काटते-काटते जिंदगी जंग हार गया : थाने से करीब 60-70 मीटर पहले प्रमोद ने जिप्सी से छलांग लगाई थी। पुलिस प्रमोद को जिप्सी में डालकर तुरंत नजदीकी जग प्रवेश चंद्र अस्पताल ले गई। आरोपी के सिर में गंभीर चोट लगी थी। डॉक्टरों ने उसे जीटीबी अस्पताल रेफर कर दिया। वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल की सीटी स्कैन मशीन खराब है। ऐसे में डॉक्टरों ने प्रमोद को दिल्ली गेट स्थित एलएनजेपी अस्पताल रेफर कर दिया। वहां चिकित्सकों ने एंबुलेंस और पुलिसकर्मियों को बताया कि मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत है।
अस्पताल में वेंटिलेटर बेड नहीं है। यहां से भी डॉक्टरों ने उसे आरएमएल अस्पताल रेफर कर दिया। आरएमएल पहुंचने पर भी डॉक्टरों ने वही जवाब दिया। रातभर एंबुलेंस स्टाफ पुलिसकर्मियों के साथ प्रमोद को लेकर अस्पतालों के चक्कर काटता रहा। सुबह उसे फिर से वापस जग प्रवेश चंद्र अस्पताल लाया गया। यहां सुबह करीब 5:45 बजे बेहतर इलाज के अभाव में प्रमोद ने दम तोड़ दिया।
एफएसएल ने भी जुटाए साक्ष्य
मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए गए हैं। बुधवार को एसडीएम ने घटनास्थल का दौरान किया। पुलिस के अलावा क्राइम टीम और एफएसएल ने मौके से साक्ष्य जुटाए।
आरोपी के खिलाफ पहले से दर्ज थे दो मामले
जिला पुलिस उपायुक्त ने बताया कि प्रमोद के खिलाफ पहले से हत्या के प्रयास और धारदार हथियार से हमला करने के दो मामले दर्ज थे। वर्ष 2003 में उसने न्यू उस्मानपुर में एक युवक पर धारदार हथियार से हमला कर दिया था। इसके अलावा 20 जून 2015 को न्यू उस्मानपुर में रुपये के लेन-देन में अब्दुल्लाह पर चाकू से हमला कर दिया था। दोनों ही उसे गिरफ्तार किया गया था, बाद में वह जमानत पर रिहा हुआ था। प्रमोद को शराब पीने की लत थी। स्थानीय लोगों का कहना था कि वह अक्सर नशे में लोगों से झगड़ा भी करता रहता था। पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से जांच कर रही है।
बेरोजगार था प्रमोद, छोटा भाई चलाता था घर का खर्च
प्रमोद के परिवार में बुजुर्ग मां के अलावा छोटा भाई जितेंद्र, पत्नी ममता (44), बेटी रितिका (20), बेटा सुधांशु (17) और 15 साल का एक और बेटा है। कई साल पहले सड़क हादसे में उसकी टांग में चोट लग गई थी। इसके बाद से वह कुछ काम नहीं कर रहा था। घर का खर्च छोटा भाई जितेंद्र ही चला रहा था। जितेंद्र की न्यू उस्मानपुर में दूध की डेयरी है। प्रमोद की मौत पर परिजनों ने प्रतिक्रिया देने से इन्कार कर दिया। एक रिश्तेदार ने बताया कि सुबह 11 बजे पुलिस ने परिजनों को सूचना दी। उसके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।