राजधानी में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ने से चिकित्सीय सेवाओं पर फिर से असर पड़ सकता है। संक्रमित मरीजों को समय पर उपचार दिलाने के लिए सरकार ने अस्पतालों में बिस्तरों को आरक्षित करना शुरू कर दिया है। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग ने 33 प्राइवेट अस्पतालों में 220 आईसीयू बेड कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित किए।
स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया कि इन 33 अस्पतालों में कुल 1900 आईसीयू बेड हैं, जिनमें से 30 मार्च तक 608 आईसीयू बिस्तर थे, जहां संक्रमितों का उपचार चल रहा था, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़ाकर 838 कर दी है। वर्तमान में 346 बिस्तरों पर मरीज भर्ती हैं। ठीक इसी तरह कोविड वार्ड में बिस्तरों की संख्या भी 1705 से बढ़ाकर 2547 कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, इन प्राइवेट अस्पतालों में राजधानी के लगभग सभी बड़े अस्पताल शामिल हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को दिल्ली के 16 निजी अस्पताल पहले ही कोरोना मरीजों के लिए वेंटिलेटर के साथ आईसीयू बेड से भर चुके हैं। इसके अलावा सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को मिलाकर 787 में से 298 वेंटिलेटर भर चुके हैं। 1229 में से 393 आईसीयू बेड भी फुल हो चुके हैं। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि अभी स्थिति नियंत्रण में है। सरकारी और निजी अस्पतालों में संक्रमितों के लिए केवल 25 फीसदी बिस्तर आरक्षित किए हैं। कुछ निजी अस्पतालों में सभी आईसीयू बेड भरे हुए हैं।
कई अस्पतालों में खाली नहीं है वेंटिलेटर
दिल्ली कोरोना वेबसाइट के अनुसार, रोहिणी में अग्रसैन इंटरनेशनल हॉस्पिटल में 15 आईसीयू बिस्तर, जयपुर गोल्डन हॉस्पिटल में 6, शालीमार बाग में मैक्स एसएस अस्पताल में 5, फोर्टिस अस्पताल में 5 में एक भी वेंटिलेटर खाली नहीं है। वेंकेटेश्वर अस्पताल द्वारका, इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर वसंत कुंज और महाराजा अग्रसेन अस्पताल पंजाबी बाग में भी बुधवार शाम 4 बजे तक एक भी वेंटिलेटर खाली नहीं था। सरिता विहार में इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में 24, पश्चिम विहार में बालाजी एक्शन मेडिकल अस्पताल में 21, पंजाबी बाग में महाराजा अग्रसेन अस्पताल और शालीमार बाग में मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में सभी आईसीयू बेड (बिना वेंटिलेटर) भरे हुए हैं।