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Swati Maliwal Case: स्वाति ही नहीं आप के इन पांच बड़े नेताओं ने भी बनाई केजरीवाल से दूरी, सबके अपने-अपने तर्क

Fri, 27 Sep 2024 03:51 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

आम आदमी पार्टी का सफर अब काफी लंबा हो चुका है लेकिन जिन उद्देश्यों के साथ यह प्रारंभ हुई और जिन लोगों ने इसकी स्थापना की उनमें से कई लोग अब इस पार्टी का हिस्सा नहीं है। अन्ना के आंदोलन से सामने आई यह पार्टी अपने कई संस्थापक सदस्यों को खो चुकी है। इन सभी ने पार्टी को इसलिए अलविदा कहा क्योंकि इनका मानना था कि पार्टी अब अपने मूल उद्देश्य से भटक चुकी है।
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Swati Maliwal Case - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आप राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के प्रकरण ने एक बार फिर आम आदमी पार्टी के काम करने के तरीके पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये आरोप तो उन्हीं की पार्टी के कई नेताओं के द्वारा लगाए जा चुका हैं कि आम आदमी पार्टी एक व्यक्ति विशेष पर केंद्रित है। 

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ऐसा भी नहीं कि स्वाति मालीवाल पहली ऐसी नेता हैं जो पार्टी में रहते हुए भी उसके खिलाफ मुखर हैं और अपनी आवाज बुलंदी से उठा रही हैं। इससे पहले भी कई नेता मुखर हुए और आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल से दूरी बना ली। सबसे पहले आप के संस्थापक सदस्य योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और शाजिया इल्मी ने पार्टी से नाता तोड़ लिया था। 

प्रशांत भूषण
प्रशांत भूषण भी आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं में से एक थे लेकिन उन्होंने भी आम आदमी पार्टी के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए थे और कहा था कि पार्टी एक व्यक्ति केंद्रित है। प्रशांत भूषण ने कहा है कि पार्टी में आतंरिक लोकतंत्र तो है, लेकिन स्वराज नहीं है। पार्टी के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाने के साथ पार्टी फंड की जांच के लिए एथिक्स कमेटी की मांग भी की थी। प्रशांत भूषण के पिता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने आप की स्थापना के समय एक करोड़ की राशि चंदे के रूप में दी थी। हालांकि जल्द ही उनका पार्टी से मोहभंग हो गया था और वो आम आदमी पार्टी से अलग हो गए थे। 
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शाजिया इल्मी
शाजिया इल्मी ने आप में आंतरिक लोकतंत्र की कमी का आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। शाजिया ने 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी छोड़ी। साल 2014 में वो आप के टिकट पर गाजियाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ी थीं, लेकिन बीजेपी प्रत्याशी वीके सिंह से शिकस्त मिली। लेकिन इसके बाद उन्होंने आप छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया। 

योगेंद्र यादव
वहीं अगर योगेंद्र यादव की बात की जाए तो उनका कहना था कि आम आदमी पार्टी का जन्म भ्रष्टाचार के खिलाफ चले एक बड़े जनांदोलन के बाद हुआ। जनता ने अन्य राजनीतिक पार्टियों की तुलना में आप में एक विकल्प देखा। आप को जो भी सफलता मिली है, वह परंपरागत राजनीति के खिलाफ जनता के मन में बैठे असंतोष के कारण थी। लेकिन अब पार्टी की कार्य करने का तरीका अन्य पार्टियों की तरह ही हो गया है। इसके बाद योगेंद्र यादव ने अपनी एक अलग राजनीतिक पार्टी स्वराज अभियान बनाई।

कुमार विश्वास
2012 में अन्ना आंदोलन से जुड़ने और आम आदमी पार्टी के साथ सक्रिय राजनीतिक की शुरुआत करने से पहले कुमार विश्वास की राजनीति में एंट्री की बात करें तो वह किसी खास योजना के तहत राजनीति में नहीं आए थे। पहले वह लोकपाल को लेकर किए गए अन्ना आंदोलन में जुड़े। इसमें अरविंद केजरीवाल के साथ वह बड़े नामों में शामिल थे। अन्ना आंदोलन के कुछ समय बाद 2012 में जब अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के गठन का फैसला किया तो वह उनके साथ नजर आए और आम आदमी पार्टी के जरिये राजनीति में आ गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव भी लड़ा। कुमार विश्वास से जब यह पूछा गया कि क्या आपकी राजनीति पर विराम लग गया है, तो उन्होंने कहा कि नहीं... मैं झूठ नहीं कह सकता कि बच्चों की कसम खाऊं की फिर कभी नहीं जाऊंगा। उन्होंने कहा कि मैं पार्टी में गलत कामों का विरोध करता था, इसलिए मुझे किनारे किया गया।
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कपिल मिश्रा
इसी क्रम में अगर बात करें तो कपिल मिश्रा ने अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए थे। कपिल मिश्रा ने कहा था कि उन्होंने मुख्यमंत्री के घर पर केजरीवाल को मंत्री सत्येंद्र जैन से दो करोड़ रुपए लेते देखा था। इसके साथ ही कपिल मिश्रा ने 400 रुपये के पानी टैंकर घोटाले में अरविंद केजरीवाल के शामिल होने का आरोप लगाया थे। इसके बाद आम आदमी पार्टी की सरकार में मंत्री रहे कपिल मिश्रा को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया था, इससे पहले उन्हें केजरीवाल की कैबिनेट से मंत्री पद से हटा दिया गया था।
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