फैसले पर अडिग
अधिवक्ता सुभाष चंद्रन के जरिये दायर याचिका में कहा गया है कि प्रतिवादी संख्या 3 को भारत या विदेश में बेहतर उपचार प्रदान करने के लिए किसी तरह की वित्तीय बाधा नहीं है। लेकिन अब वह इच्छा मृत्यु के लिए जाने के फैसले पर अडिग है। अदालत से विनम्रतापूर्वक आग्रह है कि उनकी स्थिति में सुधार के लिए अब भी आशा की एक किरण बनी हुई है।’ याचिकाकर्ता ने अनुरोध किया है कि केंद्र को एक मेडिकल बोर्ड का गठन करने का निर्देश दिया जाए।