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किसान आंदोलन : गाजीपुर बॉर्डर पर कम रही भीड़, सीमा पर बनाएंगे गर्मियों के अनुकूल माहौल

Sun, 07 Mar 2021 04:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
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ईस्टर्न पेरिफेरल पर नारेबाजी करते किसान... - फोटो : अमर उजाला....
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तीन नए कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी को कानूनी दर्जा दिए जाने की मांग  लेकर सीमाओं पर डटे किसानों के आंदोलन को 100 दिन पूरे हो गए हैं। शनिवार को गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों की संख्या काफी कम रही। अधिकतर किसान पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे गए थे। वहां उन्होंने रास्ते जाम कर शक्ति प्रदर्शन किया।

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गाजीपुर बॉर्डर आंदोलन समिति के प्रवक्ता जगतार सिंह बाजवा ने बताया कि सुबह 9 बजे ही किसान बॉर्डर से दुहाई में पेरीफेरल एक्सप्रेसवे चले गए थे। वहां उन्होंने सुबह 11 से शाम 4 बजे तक पेरीफेरल पर पहुंचने वाले वाहनों को रोककर समर्थन देने का आह्वान किया। इस दौरान किसानों ने पेरीफेरल एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली भी नहीं होने दी।

बाजवा ने बताया कि गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन स्थल पर दोपहर को मंच संचालन शुरू किया गया। किसानों ने संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर काला दिवस मनाया। इसके लिए सभी ने प्रतीकात्मक रूप से काली पट्टी बांधी। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर चल रहे मंच पर भी किसानों ने हल और फावड़े पर काली पट्टी बांधकर काला दिवस मनाया। 
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किसान समिति के सदस्य बलजिंदर सिंह मान ने बताया कि रविवार को किसान केरल दिवस मनाएंगे। केरल से आए किसानों का एक जत्था गाजीपुर बॉर्डर पर डटा हुआ है। सोमवार को आंदोलन स्थल पर किसान महिला दिवस मनाया जाएगा। इस मौके पर आंदोलन कमान की महिलाओं के हाथ रहेगी।

...मगर टीकरी बॉर्डर पर जोश में दिखे किसान
 टीकरी बॉर्डर पर शनिवार को भी किसान पूरे जोश में दिखे। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार मांगें नहीं मान लेती, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे। गर्मियों के लिए वे दिल्ली की सीमाओं पर ही अपने रहने के अनुकूल वातावरण विकसित करेंगे। भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां की महिला विंग की अध्यक्ष हरिंदर कौर ‘बिंदु’ ने कहा कि रविवार से हम नए जोश के साथ आंदोलन की शुरुआत करेंगे।

टीकरी बॉर्डर पर शनिवार को महिलाएं हजारों की तादाद में पहुंची थी। उन्हें संबोधित करते हुए हरिंदर कौर बिंदु ने कहा कि हम देश में सबसे लंबे समय तक चलने वाले जनसंघर्ष की अगुवाई कर रहे हैं। साथ ही इस बात का दुख भी है कि हम सरकार से अब तक अपनी बात नहीं मनवा पाए हैं। अब भी किसानों की मांगें जस की तस हैं। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन में हमारे सैकड़ों साथियों ने जीवन न्यौछावर कर दिया है। उनके बलिदान को हम हमेशा याद रखेंगे।

उगराहां के जनरल सेक्रेटरी सिंघारा सिंह मान ने लोगों से अपील की कि वे किसी भी हालत में दिल्ली की सीमाओं से वापस जाने के विषय में न सोचें। यदि दिल्ली की सीमाओं पर जनसमुदाय कम हुआ तो सरकार अपने मंसूबे में कामयाब हो जाएगी। पंजाब के बरनाला से टीकरी बॉर्डर पहुंची महिलाओं ने कहा कि प्रधानमंत्री जान लें कि वे रसोई छोड़कर किसान आंदोलन में शामिल हो चुकी हैं। जब तक वे किसानों की मांगें नहीं मान लेते, तब तक वे यहीं डटी रहेंगी।

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