राजधानी में पिछले तीन दिनों से लगातार प्रदूषण के स्तर में इजाफा हो रहा है। इसका प्रमुख कारण तापमान का लगातार गिरना और हवा की गति के साथ अन्य कारक शामिल हैं। हालांकि, आज दिल्ली-एनसीआर की की हवा में हल्का सुधार होने की वजह से वायु गुणवत्ता सूचकांक बहुत खराब श्रेणी के निचले स्तर पर पहुंच सकता है।
बुधवार को भी दिल्ली के वायु गुणवत्ता सूचकांक में छह अंकों की बढ़ोतरी के साथ और खराब हो गई। इससे एक दिन पहले यह बढ़ोतरी 49 अंकों की थी। वहीं, दिल्ली- एनसीआर में शामिल गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा की हवा गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड( सीपीसीबी) के अनुसार, बुधवार को राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 373 दर्ज किया गया इससे एक दिन पहले 367 सोमवार को 318 रविवार को 256 शनिवार को 231 शुक्रवार को 137 गुरुवार को 302 और गत बुधवार को 400 से अधिक रहा था।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु मानक संस्था सफर के अनुसार, पिछले 24 घंटों में पराली जलाने की घटनाओं में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है। इस कड़ी में हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में करीब 316 पराली जलाने की घटनाओं के साथ प्रदूषण में इसके हिस्सेदारी तीन फीसदी रही। मंगलवार को 258 घटनाओं के साथ यह चार फीसदी रही थी। वहीं, सोमवार को 410 घटनाओं के साथ यह 7 फ़ीसदी दर्ज की गई थी।
सफर के अनुसार, प्रदूषित तत्वों में शामिल प्रदूषण के लिए जिम्मेदार पीएम 10 और पीएम 2.5 के स्तर में भी इजाफा हुआ है। इस कड़ी में पीएम 10 का स्तर 334 और पीएम 2.5 का स्तर 196 रहा। एक दिन पहले पीएम 10 का स्तर 313 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 2.5 का स्तर 193 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया था। पीएम 2.5 का स्तर 60 से कम और पीएम 10 का स्तर 100 से कम होने पर सुरक्षित माना जाता है।
फिलहाल, हवाओं का रुख उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बना हुआ है और रफ्तार भी धीमी है। साथ ही वेंटिलेशन इंडेक्स कम होने की वजह से प्रदूषण के तत्वों को हटाने में मदद नहीं कर रहा है। यही वजह है कि दिन पर दिन हवा गंभीर श्रेणी की ओर बढ़ रही है।
हालांकि, हवा की रफ्तार तेज होने की वजह से गुरुवार को थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन शुक्रवार से एक बार फिर वेंटिलेशन टैक्स कम होने व अन्य मौसमी परिस्थितियों की वजह से हवा की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा।