केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, आज सुबह दिल्ली में इंडिया गेट के आसपास वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 342 दर्ज किया गया, जो 'गंभीर' श्रेणी में है। दिल्ली में अक्षरधाम के आसपास वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 358 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में है। INA और AIIMS के पास भी हवा खराब है।
'बच्चों के अंग नाजुक होते हैं'
सर गंगाराम अस्पताल के सह-निदेशक और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. धीरेंद्र गुप्ता ने कहा कि बच्चों के अंग नाजुक होते हैं और जो कुछ भी नाजुक अंगों को प्रभावित करता है, वह अधिक हानिकारक होता है। प्रदूषण अस्थमा या अन्य श्वसन समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए हानिकारक है। यदि एक सामान्य व्यक्ति अत्यधिक प्रदूषित हवा में सांस लेता है, तो उसके फेफड़ों में बदलाव हो सकते हैं, जिससे प्रदूषण के कारण अस्थमा हो सकता है। प्रदूषण न केवल गर्भवती महिलाओं को प्रभावित करता है, बल्कि उनके बच्चों को भी। सबसे बड़ी समस्या वाहन प्रदूषण है।
बच्चों और बुजुर्गों को डॉक्टर की सलाह
वायु गुणवत्ता पर अपोलो अस्पताल के श्वसन चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. निखिल मोदी ने कहा कि हर साल सर्दी के आगमन के साथ, हम देखते हैं कि एक्यूआई बढ़ने लगता है, क्योंकि हवा ठंडी होने पर हवा की गति कम हो जाती है। ठंडी हवा ऊपर नहीं उठती, जिसके कारण प्रदूषण निचले स्तर पर जमा हो जाता है। दिवाली से पहले, हमने देखा कि एक्यूआई बढ़ रहा था और दिवाली के बाद, यह अपेक्षित था कि एक्यूआई और बढ़ेगा। जैसे ही प्रदूषण बढ़ता है, एलर्जी या फेफड़ों की समस्याओं वाले लोगों को सांस लेने में कठिनाई, खांसी, आंखों में पानी आना और अन्य लक्षणों का सामना करना पड़ता है। दिवाली के अगले दिन से ही मरीज आने शुरू हो गए हैं। इससे बचने के लिए हमें निवारक कदम उठाने चाहिए और यदि एलर्जी या सांस की समस्या है तो दवाएं लेनी चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों को बाहर जाने से बचना चाहिए। उन्हें बाहर जाते समय मास्क पहनना चाहिए।
सीपीसीबी के अनुसार, आज सुबह दिल्ली में चांदनी चौक में 326, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 318, रोहिणी में 372 और ओखला फेज 2 में 353 के आसपास एक्यूआई दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण (GRAP-2) के नियम लागू हैं।
बढ़ते एक्यूआई पर जानें क्या बोले दिल्ली वाले
दिल्ली के एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि यह सबकी जिम्मेदारी है। अगर हर व्यक्ति जिम्मेदारी ले, तो एक्यूआई स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है। सिर्फ सरकार और एजेंसियों के सोचने से कुछ नहीं होगा। ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल के स्पष्ट आदेश हैं और अगर हम इन नियमों का पालन कर सकें, तो हम समाज की अच्छी सेवा कर रहे होंगे।
एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि प्रदूषण आज से नहीं बढ़ा है। ये तो साल से बढ़ रहा है। सब नेताओं को दोष देते हैं, लेकिन लोग खुद ऐसे ही हैं। लोग खुद नहीं सुधर रहे हैं। आपको पटाखे तो मिल जाएंगे, लेकिन उन्हें फोड़ना है या नहीं, यह आप पर निर्भर है। फिर वे शिकायत करेंगे कि सरकार कुछ नहीं कर रही।
GRAP-2 का कार्यान्वयन और इसका महत्व
GRAP-2 के लागू होने के साथ ही दिल्ली में वायु प्रदूषण के गंभीर स्तर से निपटने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। इस चरण में मुख्य रूप से उन गतिविधियों पर रोक लगाई जाती है जो वायु प्रदूषण में वृद्धि करती हैं। इनमें निर्माण और विध्वंस गतिविधियों को नियंत्रित करना, विशेष रूप से उन परियोजनाओं पर रोक लगाना जो धूल पैदा करती हैं, शामिल है। इसके अतिरिक्त, डीजल जनरेटरों के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है, सिवाय उन आवश्यक सेवाओं के जहां बिजली की आपूर्ति बाधित हो।
धुंधली दिल्ली, आतिशबाजी के निशां...
दीवाली की रात राजधानी दिल्ली में जमकर हुई आतिशबाजी के बाद सड़कों पर बिखरे बम-पटाखों के अवशेष और हवा में फैला धुआं, शहर को एक घनी धुंध की चादर में लपेट गया। आसमान में दूर तक फैली यह धुंधली परत उत्सव की चमक के साथ प्रदूषण की गंभीर तस्वीर भी पेश करती दिखी। दीयों की रोशनी और आतिशबाजी की चमक के बीच दिल्ली की हवा में घुला यह धुआं, त्योहार की खुशी और पर्यावरण की चिंता दोनों का एहसास कराता रहा। तस्वीर मध्य दिल्ली के शादीपुर, मोती नगर व कर्मपुरा इलाके की है।
जानें एक्यूआई रीडिंग के मानक
एक्यूआई रीडिंग को अच्छा (0-50), संतोषजनक (51-100), मध्यम प्रदूषित (101-200), खराब (201-300), बहुत खराब (301-400), और गंभीर (401-500) श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।