राजधानी में एक सप्ताह से कोरोना संक्रमण के मामले भले ही बढ़ रहे हैं, लेकिन उसके मुकाबले अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या बहुत कम है। कुल सक्रिय मामलों के महज 19 फीसदी रोगी कोविड अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। इसका बड़ा कारण यह भी है कि इस समय अधिकतर मरीजों में संक्रमण के हल्के लक्षण है और उनका इलाज घर पर ही किया जा रहा है।
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, कोविड अस्पतालों में 15749 बेड हैं। इन पर 5854 मरीज भर्ती हैं और 9895 खाली हैं। एक सप्ताह में दिल्ली में 6,200 नए मरीज बढ़े हैं। उसके मुकाबले अस्पतालों में महज 720 रोगी भर्ती हुए। यानी, 12 फीसदी मरीजों को ही अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ी।
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अधिकतर रोगियों में बेहद हल्के लक्षण हैं। कुल सक्रिय मामले के 65 फीसदी मरीजों का घर पर ही इलाज किया जा है। कुछ मरीजों को परेशानी होती है तो उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। इस समय सरकार का कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग पर विशेष ध्यान है। संक्रमित के संपर्क में आए हर व्यक्ति की जांच की जा रही है।
फिलहाल मास्क को ही समझें वैक्सीन : जैन
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन का कहना है कि इस समय 35 फीसदी बेड भरे हैं। आने वाले दिनों में मरीज बढ़ते हैं तो सरकार की पूरी तैयारी है। इस मौसम में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। लोगों को कोरोना से बचाव के सभी सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए। जैन के मुताबिक, संक्रमण से बचने का सबसे बेहतर उपाय मास्क ही है। जब तक वैक्सीन नहीं आ जाती। मास्क को ही वैक्सीन समझा जाए। यह कोरोना और प्रदूषण दोनों से बचाएगा।