मालीवाल ने पत्र में लिखा कि वे उचित सहायता, चिकित्सा उपचार, मुआवजा और कानूनी सहायता सुनिश्चित करने के लिए पीड़िता व परिवार के सदस्यों से मिलना चाहती थीं, लेकिन अस्पताल के अधिकारियों ने उन्हें परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया।
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी पर किशोरी के दुष्कर्म के आरोप मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का दरवाजा खटखटाया है। शाह को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि पुलिस ने मामला दर्ज करने के आठ दिन बाद तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया। पुलिस ने उन्हें अस्पताल में पीड़िता व परिवार से मिलने नहीं दिया, जबकि राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष को पुलिस अस्पताल के अंदर ले गई और पीड़िता की मां से बातचीत कराई।
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मालीवाल ने पत्र में लिखा कि वे उचित सहायता, चिकित्सा उपचार, मुआवजा और कानूनी सहायता सुनिश्चित करने के लिए पीड़िता व परिवार के सदस्यों से मिलना चाहती थीं, लेकिन अस्पताल के अधिकारियों ने उन्हें परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया। अस्पताल निदेशक और गार्डों ने बताया कि पुलिस ने अनुमति नहीं देने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने पीड़िता की मां की ओर से लिखे होने का दावा करते हुए एक पत्र दिया जो किसी को संबोधित नहीं था, उसमें लिखा था कि वह किसी से बातचीत नहीं करना चाहती। पत्र अस्पताल अधिकारियों ने मीडिया से साझा किया जो पीड़िता की पहचान का खुलासा करने जैसा है। साथ ही, निजी अस्पताल होने पर अधिकारियों पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया जा सकता, इसीलिए उन्होंने अस्पताल अधिकारियों से अनुरोध किया कि उन्हें पीड़िता या मां से मिलने की अनुमति दी जाए।
स्वाति ने कहा कि उन्होंने अस्पताल के बाहर 24 घंटे से अधिक समय तक इंतजार किया। बार-बार अनुरोध के बावजूद पुलिस और अस्पताल अधिकारियों ने मिलने की अनुमति नहीं दी। लिहाजा, पुलिस और अस्पताल अधिकारियों ने अधिकारों का दुरुपयोग किया और उन्होंने इस मामले में आयोग के कामकाज में रुकावट डाली है। स्वाति ने गृहमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने और अधिकारियों को पीड़िता या मां से मिलने की अनुमति देने का निर्देश देने का अनुरोध किया। साथ ही, पीड़िता को बेहतर इलाज और देखभाल के लिए एम्स में स्थानांतरित करने की भी मांग की।