दिल्ली मेट्रो के फेज चार में दिल्ली सरकार की वित्तीय हिस्सेदारी बढ़ाने की खबरों को केंद्र सरकार ने सिरे से खारिज किया है। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि प्रोजेक्ट में देरी होने से मेट्रो फेज-चार की लागत 5000 करोड़ रुपये तक बढ़ गई है। बावजूद इसके, केंद्र सरकार ने तीन कॉरिडोर पर दिल्ली सरकार की हिस्सेदारी में से 1000 करोड़ रुपये घटा दिए हैं।
केंद्रीय आवास व शहरी कार्य मंत्रालय की तरफ से मीडिया में इस बारे में बयान जारी किया गया कि दिल्ली सरकार की तरफ से जनवरी में मेट्रो फेज चार को लेकर भेजे प्रस्ताव के आधार पर तीन कॉरिडोर को मंजूरी दी गई है। इसमें दिल्ली सरकार की हिस्सेदारी 8,872 करोड़ रुपये थी, लेकिन केंद्र ने दिल्ली को राहत देते हुए इसकी लागत 7,844 करोड़ रुपये कर दी है।
केंद्र व राज्य के बीच वित्तीय भागीदारी का फार्मूला केंद्र ने मेट्रो रेल पॉलिसी के आधार पर तय किया है। केंद्र ने दिल्ली सरकार के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि बजट बढ़ाकर मेट्रो में अड़चन डालने की केंद्र कोई कोशिश नहीं कर रहा है। अभी तक इस बारे में दिल्ली सरकार की कोई चिट्ठी मंत्रालय को नहीं मिली है। इसके उलट केंद्र का आरोप है कि दिल्ली सरकार मेट्रो फेज चार के काम को रोकने की कोशिश कर रही है।