क्रिसमस के दिन नोएडा और दिल्ली वालों को प्रधानमंत्री मेट्रो फेज तीन की मजेंटा लाइन के एक सेक्शन को खोलकर जनता को तोहफा देने वाले हैं। उद्घाटन से ठीक पहले ही ट्रायल रन के दौरान इस लाइन पर चलने वाली मेट्रो दुर्घटना का शिकार हो गई है। ड्राइवरलेस यह ट्रेन पहली बार दिल्ली मेट्रो का हिस्सा बनने वाली है।
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पहली बार ड्राइवर लेस मेट्रो ट्रेन तकनीकी का इस्तेमाल
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कालिंदी कुंज डिपो में सोमवार ट्रायल रन के दौरान ड्राइवर लेस यह ट्रेन डिपो की दीवार तोड़ते हुए बाहर निकल गई। राहत की बात ये रही कि इस हादसे में जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ है।
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प्रारंभिक जांच के दौरान पता चला है कि इस दुर्घटना के पीछे तकनीकी कारण जिम्मेदार है। दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन सुविधा में दिल्ली मेट्रो को सबसे सुरक्षित साधनों में से एक माना जाात है। ऐसे में यह दुर्घटना मेट्रो सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
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बता दें कि 12.64 किलोमीटर का यह सेक्शन खुलने के बाद नोएडा और साउथ दिल्ली नजदीक आ जाएगा। खास बात यह कि 25 दिसंबर को मेट्रो का 15वां परिचालन दिवस और पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी का जन्मदिन भी है। अटल विहारी वाजपेयी ने ही 2002 में पहली मेट्रो लाइन पर परिचालन को हरी झंडी दिखाई थी। मजेंटा लाइन (बॉटेनिकल गार्डन से जनकपुरी पश्चिम) 36.98 किलोमीटर लाइन है, जिस पर 25 स्टेशन हैं। फिलहाल सेक्शन के 12.64 किलोमीटर की लाइन खुलने के लिए तैयार है। इसमें कुल नौ स्टेशन हैं, जो कि नोएडा और दक्षिणी दिल्ली को नजदीक लाएंगे। इस सेक्शन के खुलने से दिल्ली को एक और इंटरचेंज कालकाजी मंदिर पर मिलेगा। जबकि दिल्ली से बाहर पहला इंटरचेंज नोएडा में बॉटेनिकल गार्डन के रूप में मिलेगा। प्रधानमंत्री नोएडा के बॉटेनिकल गार्डन से हरी झंडी दिखाएंगे। वहां से मेट्रो से सफर भी कर सकते हैं। प्रधानमंत्री के आगमन के चलते मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी भी पहली बार नोएडा पहुंचे सकते हैं। हालांकि, अभी आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की जा रही है।
फैक्ट फाइल: 36.98 किलोमीटर लंबी है मजेंटा लाइन लाइन।
25 मेट्रो स्टेशन है इस पूरी लाइन पर।
12.64 किलोमीटर का एक सेक्शन अभी खुलेगा।
09 स्टेशन होंगे खुलने वाले सेक्शन पर।
90 सेकेंड तक की फ्रीक्वेंसी चल सकती है।
01 लाख से अधिक यात्रियों को मिलेगा।
मेट्रो में पहली बार ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन तकनीकी कम्युनिकेशन बेस्ड सिग्नलिंग सिस्टम (सीबीएसटी) का प्रयोग हो रहा है। इससे मेट्रो की फ्रीक्वेंसी भी मौजूदा व्यवस्था से अच्छी होगी। फ्रीक्वेंसी 90 से 100 सेकेंड तक हो सकती है। स्टेशनों पर शुरू से ही पीएसडी (प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर) वाले स्टेशन होंगे। नई तकनीकी के चलते मेट्रो को इसका ट्रायल पूरा करने में एक साल का समय लग गया। हालांकि, फिलहाल ड्राइवरलेस मेट्रो तकनीकी होने के बाद भी डीएमआरसी ड्राइवर के साथ इसे चलाएगी।
नई मेट्रो ट्रेन की खास बातें एक नजर में
20 फीसदी कम उर्जा खपत करेगी।
10 फीसदी अधिक स्पीड होगी।
3.2 मीटर चौड़ा है अभी 2.9 मीटर होता है।
40 यात्री अधिक आएंगे ड्राइवर कार हटने से।
50 मीटर दूर से ट्रैक पर किसी वस्तु के होने पर लगेगा ब्रेक।
5 कैमरे अलग-अलग जगह ट्रेन के बाहर होंगे।