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Delhi: पंक्चुअलिटी और विश्वसनीयता में दिल्ली मेट्रो का जलवा, दुनिया की अग्रणी मेट्रो प्रणालियों को छोड़ा पीछे

Sun, 09 Aug 2026 11:41 AM IST
Vijay Singh Pundir अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

वर्ष 2026 में अपने विशाल नेटवर्क और बढ़ते बेड़े के बावजूद दिल्ली मेट्रो ने 99.95 प्रतिशत की असाधारण पंक्चुअलिटी हासिल की है।
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दिल्ली मेट्रो (फाइल फोटो) - फोटो : X/@OfficialDMRC
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विस्तार
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दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने ट्रेन परिचालन की समयबद्धता (पंक्चुअलिटी) और विश्वसनीयता के मामले में हांगकांग मेट्रो, पेरिस मेट्रो और न्यूयॉर्क सबवे जैसी विश्व की कुछ सबसे प्रतिष्ठित मेट्रो प्रणालियों से भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए खुद को दुनिया की बेहतरीन शहरी रेल प्रणालियों में स्थापित किया है।

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यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष महत्व रखती है क्योंकि डीएमआरसी परिचालन प्रदर्शन को मापने के लिए अत्यंत कड़े मानदंड अपनाता है। जहां अनेक मेट्रो प्रणालियां ट्रेन के कई मिनट विलंब से पहुंचने पर ही उसे विलंबित मानती हैं, वहीं दिल्ली मेट्रो में यदि कोई ट्रेन अपने गंतव्य स्टेशन पर निर्धारित समय से 59 सेकंड से अधिक विलंब से पहुंचती है, तो उसे विलंबित माना जाता है।

दिल्ली मेट्रो की ट्रेन पंक्चुअलिटी वर्ष 2003 में 98.27 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2005 में बढ़कर 99.64 प्रतिशत हो गई। इस उपलब्धि के साथ, दिल्ली मेट्रो ने अपने परिचालन की शुरुआत के महज दो वर्षों के भीतर ही 99% से अधिक पंक्चुअलिटी हासिल करने वाली दुनिया की चुनिंदा मेट्रो प्रणालियों की प्रतिष्ठित श्रेणी में स्थान बना लिया। इसके बाद से डीएमआरसी ने वर्ष दर वर्ष लगातार 99.9% ट्रेन पंक्चुअलिटी हासिल की है। वर्ष 2026 में, अपने विशाल नेटवर्क और बढ़ते बेड़े के बावजूद, दिल्ली मेट्रो ने 99.95 प्रतिशत की असाधारण पंक्चुअलिटी हासिल की है।
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नेटवर्क के व्यापक विस्तार के बावजूद विश्वसनीयता कायम
आमतौर पर किसी मेट्रो नेटवर्क और उसके बेड़े के विस्तार के साथ-साथ परिचालन एवं रखरखाव संबंधी चुनौतियां भी बढ़ती हैं, जिसका प्रतिकूल प्रभाव समयबद्धता और विश्वसनीयता पर पड़ सकता है। हालांकि, दिल्ली मेट्रो ने अपने 23 वर्षों के परिचालन के दौरान इस सामान्य प्रवृत्ति को पीछे छोड़ते हुए लगातार उच्च स्तर की परिचालन दक्षता बनाए रखी है।

ट्रेन हेडवे में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। शुरुआती वर्षों में जहां ट्रेनों के बीच अंतराल लगभग सात मिनट था, वहीं आज सबसे व्यस्त कॉरिडोर पर यह घटकर मात्र 2 मिनट 18 सेकंड रह गया है। इससे तेजी से बढ़ती यात्री संख्या को कुशलतापूर्वक संभालने में दिल्ली मेट्रो को मदद मिली है।

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